दिवाली के बाद भी नहीं सस्ते होंगे हवाई टिकट! जानिए आसमान छू रहे किरायों के पीछे की असली वजह

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स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 22 अक्टूबर 2026:
दिवाली और फेस्टिव सीजन नजदीक आते ही हवाई टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि त्योहार का सीजन खत्म होने के बाद भी टिकटों के सस्ते होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। हालांकि, त्योहारों के बाद यात्रियों की संख्या में थोड़ी कमी आने से कुछ चुनिंदा रूटों पर किराए में मामूली राहत मिल सकती है, लेकिन विमान किराए में किसी बड़ी गिरावट की उम्मीद फिलहाल बिल्कुल नहीं है।

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कई रूटों पर 68% तक महंगा हुआ हवाई सफर

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के आंकड़ों के मुताबिक, 1 सितंबर से 10 नवंबर के बीच यात्रा के लिए औसत एकतरफा हवाई किराये में पिछले साल के मुकाबले जबरदस्त उछाल आया है। दिल्ली-हैदराबाद रूट पर किराया सबसे ज्यादा 68% तक बढ़ गया है। इसके अलावा मुंबई-कोलकाता रूट पर 51%, दिल्ली-गोवा रूट पर 39% और मुंबई-बेंगलुरु रूट पर 37% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि यात्रियों को सफर के लिए पहले से काफी ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

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हवाई सफर महंगे होने की 3 मुख्य वजहें

विशेषज्ञों और ICRA की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लाइट के टिकट महंगे होने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी वजहें जिम्मेदार हैं:

  1. विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतें: 1 अक्टूबर से घरेलू एटीएफ की कीमत में करीब 16 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई, जिससे इसकी कीमत लगभग 137 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई। अक्टूबर में घरेलू विमान ईंधन पिछले साल के मुकाबले 46.2% महंगा था। एयरलाइंस के कुल ऑपरेशन खर्च का 30 से 40 हिस्सा सिर्फ ईंधन पर खर्च होता है।

  2. डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी: एयरलाइंस के लगभग 35% से 50% खर्च डॉलर में होते हैं, जिसमें विमान ईंधन, लीज रेंट और मेंटेनेंस शामिल हैं। रुपया कमजोर होने के कारण कंपनियों को इन सेवाओं के लिए अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।

  3. पश्चिम एशिया में संघर्ष: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन पर असर पड़ा है। हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और लंबे वैकल्पिक रास्तों के कारण एयरलाइंस का खर्च बढ़ा है, जिससे घरेलू उड़ानों के शेड्यूल और सीटों की उपलब्धता पर भी दबाव देखा जा रहा है।

क्या यात्रियों की संख्या घटने से घटेंगे दाम?

वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले 1.9% की गिरावट आई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में 19.3% की कमी दर्ज हुई है। एजेंसी का अनुमान है कि पूरे वित्त वर्ष में घरेलू ट्रैफिक 3 से 6% बढ़ सकता है, लेकिन ईंधन महंगा होने और उड़ानों पर दबाव बने रहने के कारण यात्रियों को किराए में बड़ी राहत मिलना मुश्किल है।

क्या सरकार के नए नियमों से मिलेगी राहत?

केंद्र सरकार हवाई किराए में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए नए नियम ला रही है। हालांकि, इनका मकसद टिकटों की कीमत तय करना नहीं है। नई व्यवस्था के तहत एयरलाइंस को अपने किराए का ढांचा एक महीने पहले नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को देना होगा और अपनी वेबसाइट पर भी प्रदर्शित करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में केंद्र सरकार से अंतिम नियम पेश करने को कहा है, लेकिन इन नियमों से आम दिनों या त्योहारों पर टिकट सस्ते होने की कोई गारंटी नहीं मिलती है।