सोना रिकॉर्ड से 26% नीचे, क्या दिवाली तक फिर महंगा होगा?

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स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 20 अक्टूबर 2026:
सोने की कीमतों में गिरावट के बाद भारतीय खरीदारों का रुख बदल रहा है। दशहरा और दिवाली के दौरान जहां कुछ परिवार हल्के गहने खरीद रहे हैं, वहीं कई लोग सोने के सिक्कों, बार और गोल्ड ETF में निवेश को तरजीह दे रहे हैं। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हल्की तेजी आई। अब निवेशकों की नजर 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। इसके फैसले और महंगाई के आंकड़े आने वाले दिनों में सोने की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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सोने की कीमतों में फिर क्यों आई तेजी?

मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.1% बढ़कर 4,145.22 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.1% की तेजी के साथ 4,164.70 डॉलर पर कारोबार कर रहा था।

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यह तेजी जनवरी 2026 में बने रिकॉर्ड स्तर से सोने की कीमतों में 26% से अधिक की गिरावट के बाद आई है। कमजोर अमेरिकी डॉलर ने सोने को सहारा दिया। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में कमी से भी सोने को समर्थन मिला।

पीएल कैपिटल में कमोडिटीज के हेड आशीष राजोदिया ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी स्टेटमेंट और आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी। उन्होंने आगाह किया कि तेल की कीमतों में दोबारा तेजी या फेड के सख्त रुख से सोने और चांदी पर दबाव पड़ सकता है।

ब्याज दरों का सोने पर क्या असर होगा?

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर की बैठक को लेकर निवेशक सतर्क हैं। CME के फेडवॉच टूल के अनुसार, ट्रेडर्स को 82% उम्मीद है कि अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में बदलाव नहीं होगा। वहीं, दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 89% बताई गई है।

आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए दबाव पैदा करती हैं। इसकी वजह यह है कि सोना अपने धारक को ब्याज नहीं देता। जब ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों का आकर्षण बढ़ता है, तो सोना रखने की अवसर लागत भी बढ़ जाती है।

इसके उलट, अमेरिकी डॉलर कमजोर होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत तय किए जाने वाला सोना सस्ता पड़ सकता है। यही वजह है कि डॉलर और ब्याज दरों में होने वाले बदलाव पर सोने के बाजार की नजर बनी हुई है।

गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड में बढ़ा निवेश

सोने में निवेश का रुझान केवल पारंपरिक गहनों तक सीमित नहीं है। गोल्ड ETF में अगस्त के दौरान 2,596.70 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। यह जुलाई में दर्ज 1,559 करोड़ रुपये के निवेश से ज्यादा था। गोल्ड ETF में यह लगातार तीसरा महीना था, जब शुद्ध निवेश दर्ज किया गया।

अगस्त में गोल्ड ETF के तहत प्रबंधित संपत्ति यानी AUM बढ़कर करीब 1.91 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसके पास 121.3 टन सोना था। साल की शुरुआत से अब तक गोल्ड ETF में कुल निवेश 4.22 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

डिजिटल गोल्ड की खरीदारी भी बढ़ी है। जून से अगस्त के बीच इसमें औसतन 2,500 करोड़ रुपये प्रति माह की खरीदारी हुई। अगस्त में डिजिटल गोल्ड की खरीद पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 110% ज्यादा रही।

वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स का औसत दैनिक कारोबार पिछले महीने के मुकाबले 38% बढ़कर करीब 29,500 करोड़ रुपये हो गया। यह पिछले पांच महीनों में सबसे अधिक था।

महंगे सोने से फिजिकल डिमांड पर असर

निवेश के दूसरे तरीकों में तेजी के बीच सोने की भौतिक मांग कमजोर हुई है। अगस्त में भारत का सोने का आयात घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया। यह जुलाई के मुकाबले 45% और पिछले साल के अगस्त की तुलना में 58% कम था।

घरेलू बाजार में सोने की कीमतें आयात लागत से नीचे रहीं। 11 सितंबर तक सोने पर डिस्काउंट बढ़कर 78 डॉलर प्रति औंस हो गया। इसके पीछे एक वजह पुराने गहनों के बदले नए गहने खरीदने वाले ग्राहकों का रुझान भी बताया गया।

दिवाली पर भारतीय कैसे खरीद रहे सोना?

सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद त्योहारों पर इसे खरीदने की परंपरा बनी हुई है। लेकिन ऊंची कीमतों के कारण परिवारों के खरीदारी करने के तरीके में बदलाव दिख रहा है। कुछ लोग कम वजन के गहने चुन रहे हैं, जबकि कुछ निवेश के लिए सिक्के, बार और गोल्ड ETF की ओर बढ़ रहे हैं।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च हेड राजीव शरण ने मिंट की रिपोर्ट में बताया कि त्योहारों की शुरुआत के समय 24 कैरेट सोना करीब 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। उनके मुताबिक, परिवारों का कुल बजट लगभग उतना ही बना हुआ है, लेकिन वे पहले के मुकाबले कम वजन के गहने खरीद रहे हैं।

राजीव शरण के अनुसार, बदलाव सोने के प्रति भारतीयों के लगाव में नहीं, बल्कि उसे खरीदने के तरीके में आया है। निवेश के लिए सोना खरीदने का चलन भी बढ़ रहा है। उन्होंने अनुमान जताया कि अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों के कारण सोने की कीमतों में बहुत तेज उछाल की संभावना सीमित रह सकती है और दाम करीब 5% के दायरे में ऊपर-नीचे हो सकते हैं। कुछ खरीदार हालिया गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में भी देख रहे हैं।

क्या दिवाली तक सोना महंगा होगा?

दिवाली तक सोने की कीमतों में क्या बदलाव आएगा, यह कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगा। भारत में त्योहारों और शादी-ब्याह की मांग के साथ अमेरिकी मौद्रिक नीति, महंगाई के अनुमान, ट्रेजरी यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

स्मॉलकेस मैनेजर और ओमनीसाइंस कैपिटल के CEO विकास गुप्ता ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि बाजार में लंबे समय के लिए सोने को लेकर सकारात्मक रुख बना हुआ है। हालांकि, बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें इस तस्वीर को जटिल बना सकती हैं।

उनके मुताबिक, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की मांग को सहारा दे सकती है। दूसरी ओर, दूसरे निवेशकों की बिकवाली कीमतों में तेजी को सीमित कर सकती है।

इसलिए, हालिया गिरावट के बाद सोना खरीदने का फैसला करने वालों के लिए केवल मौजूदा भाव देखना पर्याप्त नहीं होगा। आने वाली फेड बैठक, ब्याज दरों के संकेत और महंगाई से जुड़े आंकड़े भी अहम रहेंगे। फिलहाल, दिवाली तक सोने की कीमतों में तेजी या गिरावट को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालने के बजाय बाजार के इन संकेतों पर नजर रखना जरूरी है।