स्वतंत्र बोल
दुर्ग 19 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ के भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के निजीकरण की खबरों को प्रबंधन ने झूठा और भ्रामक बताया है। रविवार, 18 अक्टूबर को जारी बयान में प्रबंधन ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ प्रिंट मीडिया में इस तरह की खबरें फैलाई जा रही हैं। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अडानी समूह के संभावित दौरे को लेकर सवाल उठाए थे। इस्पात मंत्रालय और प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक टीम भी निजीकरण के दावों का खंडन कर चुकी है।
14 अक्टूबर की पोस्ट के बाद तेज हुई चर्चा
भिलाई स्टील प्लांट के निजीकरण की चर्चा 14 अक्टूबर को भूपेश बघेल की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद तेज हुई। बघेल ने X पर दावा किया था कि अडानी समूह के लोग प्लांट देखने आने वाले हैं। उन्होंने इसे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग को बेचने की संभावित कोशिश से जोड़ते हुए कहा था कि बीएसपी छत्तीसगढ़ की पहचान है और इसे बिकने नहीं दिया जाएगा।
बघेल ने भाजपा नेताओं से भी संयंत्र को बचाने के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की अपील की थी। इसके बाद प्रदेश में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।
देवेंद्र यादव बोले- बीएसपी छत्तीसगढ़ की पहचान
भिलाई नगर के विधायक देवेंद्र यादव ने भी संयंत्र के निजीकरण का विरोध किया। उन्होंने कहा कि बीएसपी केवल एक कारखाना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान है और इससे लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। यादव ने कहा कि वह संयंत्र को अडानी या किसी अन्य निजी कंपनी को बेचने का विरोध करेंगे और इसके लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
रिकेश सेन ने दी धरने की चेतावनी
वैशाली नगर के भाजपा विधायक रिकेश सेन ने कांग्रेस नेताओं से बीएसपी को निजी कंपनी को बेचने की कोशिश से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि अगर बिक्री की कोशिश हुई तो वह धरने पर बैठेंगे। सेन ने कांग्रेस नेताओं पर अफवाह फैलाने का आरोप भी लगाया था। उन्होंने भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव के घर के बाहर धरना देने की बात कही। इसके जवाब में बघेल ने कहा कि अगर सेन को विरोध करना है तो उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने धरना देना चाहिए, क्योंकि यह सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को बचाने का मुद्दा है।
अडानी टोटल गैस के साथ समझौता भी चर्चा में
बीएसपी के निजीकरण की चर्चा के बीच अडानी टोटल गैस लिमिटेड (ATGL) के साथ हुए समझौते का भी जिक्र सामने आया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 16 जुलाई 2026 को बीएसपी और ATGL के बीच पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की आपूर्ति को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ था। इसका उद्देश्य संयंत्र और टाउनशिप में गैस की आपूर्ति करना बताया गया है। इसी समझौते के सिलसिले में कुछ अधिकारियों के बीएसपी दौरे की चर्चा भी हुई। हालांकि, PNG की आपूर्ति से जुड़ा समझौता अपने आप में संयंत्र के निजीकरण का प्रमाण नहीं है।
इस्पात मंत्रालय और PIB भी कर चुके हैं खंडन
बीएसपी प्रबंधन के बयान से पहले इस्पात मंत्रालय अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर निजीकरण से जुड़ी खबरों का खंडन कर चुका है। PIB फैक्ट चेक टीम ने भी इन दावों को झूठा बताया था। अब प्रबंधन ने भी स्पष्ट किया है कि प्लांट बेचने की खबरें भ्रामक हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में संयंत्र की बिक्री के किसी आधिकारिक फैसले का उल्लेख नहीं है।
बीएसपी से लोहा-स्क्रैप चोरी का मामला अलग
भिलाई इस्पात संयंत्र से कथित लोहा और स्क्रैप चोरी का मामला भी चर्चा में है। इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने के लिए सहमति दी है। राज्य सरकार की अधिसूचना का उल्लेख छत्तीसगढ़ राजपत्र में किया गया है। इसके बाद अपराध क्रमांक 277/2026 से जुड़े मामले की जांच CBI के दायरे में आई है। इस मामले को लेकर रिकेश सेन ने आरोप लगाया था कि चोरी के पीछे बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है और इसमें अधिकारियों तथा नेताओं की मिलीभगत हो सकती है। ये आरोप हैं; जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इनकी पुष्टि हो सकेगी।
बीएसपी को लेकर आगे क्या?
फिलहाल बीएसपी के निजीकरण की खबरों को प्रबंधन, इस्पात मंत्रालय और PIB फैक्ट चेक खारिज कर चुके हैं। दूसरी ओर, भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव ने संयंत्र को सार्वजनिक क्षेत्र में बनाए रखने की मांग उठाई है, जबकि रिकेश सेन ने दस्तावेज सार्वजनिक करने की चुनौती दी है। ऐसे में इस मुद्दे पर आगे की बहस का केंद्र निजीकरण के दावों और उनके समर्थन में पेश किए जाने वाले प्रमाणों पर रहेगा।


