स्वतंत्र बोल
रायपुर 18 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेजों पर हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट के नाम पर छात्रों से हर साल 4.50 लाख रुपये से अधिक की राशि वसूलने का आरोप लगा है। पालकों का दावा है कि वर्ष 2022-23 से यह राशि अचानक बढ़ाई गई और स्वैच्छिक सुविधाओं को छात्रों के लिए अनिवार्य कर दिया गया। इस मामले में पालकों ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को पत्र सौंपकर शिकायत की है।
पालकों की ओर से निश्चिय बाजपेयी ने रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) के नियमों का उल्लंघन कर वसूली की जा रही है। पालकों के मुताबिक, इन सुविधाओं की राशि ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ के आधार पर ली जानी चाहिए।
जांच के बाद राशि लौटाने का आदेश जारी होने का दावा
पालकों ने बताया कि उनकी शिकायत पर पहले प्रवेश तथा फीस नियामक समिति ने मामले की जांच की थी। समिति ने छात्रों को राशि लौटाने और तीन निजी मेडिकल कॉलेजों पर 10 लाख रुपये का अर्थदंड लगाने की अनुशंसा की थी। पालकों के अनुसार, राज्य शासन ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया था। हालांकि, पालकों का आरोप है कि आदेश जारी होने के एक साल बाद भी निजी मेडिकल कॉलेजों ने इसका पालन नहीं किया। उनका दावा है कि नए सत्र में दाखिला लेने वाले छात्रों से भी इसी तरह राशि वसूली गई।
तीन साल में 500 करोड़ रुपये वसूली का दावा
पालकों के अनुसार, प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में फिलहाल करीब 3,000 मेडिकल छात्र पढ़ रहे हैं। उनका दावा है कि प्रति छात्र सालाना 4.50 लाख रुपये से अधिक की वसूली के हिसाब से पिछले तीन वर्षों में करीब 500 करोड़ रुपये वसूले गए हैं। पालकों का कहना है कि शासन ने यह राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस साल करीब 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली की गई है। पालकों ने शासन के आदेश का पालन नहीं होने और छात्रों पर दबाव बनाए जाने को गंभीर मामला बताया है।
छात्रों के भविष्य पर दबाव बनाने का आरोप
पालकों का आरोप है कि कुछ लोग इस मामले में सक्रिय हैं और छात्रों के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर दबाव बनाया जाता है। उन्होंने इसे दबावपूर्वक वसूली का मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग उठाई है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी पालकों की ओर से लगाए गए आरोपों और उनके द्वारा बताए गए आदेश पर आधारित है। संबंधित निजी मेडिकल कॉलेजों का पक्ष इन तथ्यों में शामिल नहीं है।


