जमीन पर घर नहीं बनाते, 20 मीटर ऊंचे पेड़ों पर बसाते हैं पूरा परिवार; जानिए क्यों

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स्वतंत्र बोल
पापुआ 26 सितम्बर 2026 : इंडोनेशिया के पापुआ क्षेत्र के घने जंगलों में कोरोवाई जनजाति के लोग पेड़ों पर बने घरों में रहते हैं। ये घर जमीन से करीब 15 से 20 मीटर की ऊंचाई पर बनाए जाते हैं। कोरोवाई समुदाय की जीवनशैली जंगल, शिकार और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित है। पेड़ों पर घर बनाने की परंपरा उनकी सबसे खास पहचान मानी जाती है।

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कोरोवाई को पापुआ की स्वदेशी जनजातियों में शामिल किया जाता है। यह समुदाय लंबे समय तक बाहरी दुनिया से काफी दूर रहा है। पेड़ों पर घर बनाने की उनकी परंपरा ने दुनिया का ध्यान खींचा है।

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पेड़ों पर क्यों बनाते हैं घर?

कोरोवाई लोगों के पेड़ों पर घर बनाने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। इनमें सांप और दूसरे जंगली जानवरों से बचाव शामिल है। इसके अलावा समुदाय की मान्यताओं में बुरी आत्माओं का भी जिक्र मिलता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार बुरी आत्माएं जमीन पर रहती हैं। ऐसे में पेड़ों पर रहना सुरक्षा से जुड़ा माना जाता है। पेड़ों पर बने घरों तक पहुंचने के लिए प्राकृतिक संसाधनों से तैयार ढांचे का इस्तेमाल किया जाता है। ये घर लकड़ी, बेंत और साबूदाना के पत्तों जैसी जंगल में मिलने वाली सामग्रियों से बनाए जाते हैं।

जंगल से मिलता है खाने का सामान

कोरोवाई समुदाय का जीवन जंगल पर काफी निर्भर है। लोग शिकार करने के साथ फल, कंद और दूसरे प्राकृतिक संसाधन जुटाते हैं। पेड़ों पर बने घरों के कारण आसपास के जंगल में भोजन तलाशने और छोटे जानवरों तक पहुंचने में भी सुविधा मिलती है। समुदाय में काम का पारंपरिक बंटवारा भी बताया जाता है। पुरुष शिकार और भोजन जुटाने का काम करते हैं, जबकि महिलाएं घरेलू काम और बच्चों की देखभाल करती हैं।

नरभक्षण से जुड़े दावे

कोरोवाई जनजाति को लेकर कुछ रिपोर्टों में नरभक्षण से जुड़ी पुरानी परंपराओं और मान्यताओं का उल्लेख किया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इसे समुदाय के कुछ मामलों और परंपराओं से जोड़ा गया है। इसे पूरे समुदाय की वर्तमान जीवनशैली के रूप में सामान्यीकृत नहीं किया जा सकता। कोरोवाई लोगों की पेड़ों पर घर बनाने की परंपरा और जंगल पर आधारित जीवनशैली आज भी इस समुदाय को दुनिया की चर्चित स्वदेशी संस्कृतियों में शामिल करती है।