स्वतंत्र बोल
रायपुर 16 सितम्बर 2026. जगदलपुर में 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में विशेष NIA अदालत ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत ने यह फैसला सुनाया। हालांकि, मृत्युदंड की सजा पर अमल के लिए हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 407 के तहत निचली अदालत से मिली फांसी की सजा तब तक लागू नहीं की जा सकती, जब तक हाईकोर्ट उसकी पुष्टि नहीं कर देता।
25 मई 2013 को सुकमा से लौट रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा0 के काफिले पर झीरम घाटी में नक्सलियों ने हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की मौत हुई थी।
10 दोषियों को मिली फांसी की सजा
इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। इसके बाद 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही।
दोषियों में प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मांडवी, कोसा कवासी उर्फ कोसाराम, आयता मरकाम, मदकामी देवा, जोगा मदकामी, बनजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा और महादेव नाग शामिल हैं।
विशेष NIA अदालत ने 5 सितंबर 2026 को इन सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे।
क्या हुआ था 25 मई 2013 को?
2013 में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने थे। उस समय रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। कांग्रेस चुनाव से पहले पूरे राज्य में परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी। 25 मई को सुकमा में परिवर्तन रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर की ओर रवाना हुआ था।
काफिले में करीब 25 गाड़ियां थीं। इनमें करीब 200 नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। सबसे आगे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा की गाड़ी थी। उनके पीछे महेंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैदू की गाड़ी चल रही थी। इसके बाद बस्तर के कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार का वाहन था।
दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी पहुंचा। यहां नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया था। गाड़ियां रुकते ही फायरिंग शुरू हो गई। नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की मौके पर ही मौत हो गई।
करीब डेढ़ घंटे तक फायरिंग चली। इसके बाद शाम करीब 5:30 बजे नक्सली पहाड़ियों से नीचे आए और एक-एक गाड़ी की तलाशी लेने लगे।
महेंद्र कर्मा को नाम से पहचाना
एक गाड़ी में नक्सलियों को महेंद्र कर्मा मिले। सलवा जुडूम आंदोलन से जुड़े होने के कारण नक्सली उन्हें अपना दुश्मन मानते थे। चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावरों ने कुछ नेताओं को नाम लेकर पहचाना और उन्हें निशाना बनाया।
हमले में महेंद्र कर्मा की भी हत्या कर दी गई। इस हमले में कांग्रेस की तत्कालीन शीर्ष नेतृत्व टीम के कई प्रमुख नेताओं के साथ अन्य लोग भी मारे गए थे।
11 आरोपी थे, एक की ट्रायल के दौरान मौत
झीरम घाटी मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। इनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। बाकी 10 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल जारी रहा।
NIA ने वर्ष 2015 में करीब 1,000 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी। अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 5 सितंबर को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद 16 सितंबर को सजा सुनाई गई।


