मनरेगा से बनने वाले तालाब पर फंसा पेंच, कब्जे के आरोप और वैध दस्तावेजों के दावों के बीच आमने-सामने आए दो पक्ष

स्वतंत्र बोल
मुंगेली 16 जून 2026 : मुंगेली जिले के लोरमी क्षेत्र में मनरेगा योजना के तहत प्रस्तावित तालाब निर्माण अब बड़े जमीनी विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है। ग्राम पंचायत राम्हेपुर (N) में तालाब निर्माण के लिए चिन्हित भूमि को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण भूमि को शासकीय बताते हुए कब्जा हटाने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर संबंधित व्यक्ति वैध पट्टे और सरकारी दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर अपना अधिकार जता रहा है।

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जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत राम्हेपुर (N) के सरपंच, उपसरपंच और पंचों ने संयुक्त रूप से एसडीएम लोरमी तथा जनपद पंचायत सीईओ को आवेदन सौंपकर शिकायत दर्ज कराई है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि आंछीडोंगरी निवासी रामकुमार साहू ने उस भूमि पर कब्जा कर रखा है, जहां मनरेगा योजना के तहत तालाब निर्माण स्वीकृत किया गया है।

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ग्रामीणों का कहना है कि तालाब निर्माण गांव और किसानों के हित से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य है, लेकिन भूमि विवाद के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति को समझाने के प्रयास किए गए, लेकिन उसने निर्माण कार्य का विरोध करते हुए इसे रुकवाने की चेतावनी दी।

शिकायत के बाद गांव में नाराजगी का माहौल बन गया है। पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि भूमि वास्तव में शासकीय है तो उसे तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, ताकि स्वीकृत तालाब निर्माण कार्य शुरू हो सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आए रामकुमार साहू ने पंचायत के सभी दावों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि जिस भूमि को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह उनके नाम पर वैध रूप से दर्ज है। उन्होंने अपने पक्ष में वर्ष 2018 में जारी राजस्व विभाग के दस्तावेज और फार्म-ए प्रस्तुत करते हुए दावा किया है कि उन्हें भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत कृषि प्रयोजन के लिए भूमि-स्वामी अधिकार प्रदान किए गए हैं।

रामकुमार साहू का कहना है कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेज साफ तौर पर भूमि पर उनके अधिकार को प्रमाणित करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक कारणों से उन्हें बदनाम करने और उनकी जमीन पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

इस विवाद ने प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ पंचायत और ग्रामीण जनहित में तालाब निर्माण की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भूमि पर निजी स्वामित्व का दावा दस्तावेजों के साथ किया जा रहा है। ऐसे में मामले की सच्चाई राजस्व अभिलेखों और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम लोरमी ने जनपद पंचायत से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन अब संबंधित दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच करेगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि विवादित भूमि शासकीय है या वैध पट्टाधारी के अधिकार क्षेत्र में आती है।

फिलहाल गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और प्रशासन दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। सभी की नजर अब जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।