परिवार के विरोध के बीच प्रेमी संग चली गई युवती, हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश; कहा- कोई नहीं रोक सकता साथ रहने से

स्वतंत्र बोल

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बिलासपुर 11 जून 2026: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंतरधार्मिक विवाह करने वाले एक वयस्क दंपती को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट कहा है कि बालिग महिला और पुरुष को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने कहा कि दो वयस्क यदि अपनी इच्छा से विवाह करते हैं तो उनके वैवाहिक जीवन में किसी भी व्यक्ति या परिवार को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। साथ ही पुलिस प्रशासन को दंपती की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की खंडपीठ ने अंबिकापुर निवासी Mohammad Zeeshan (26) और Anya Soni (25) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।

याचिका के अनुसार दोनों लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे और आपसी सहमति से विवाह करना चाहते थे। अलग-अलग धर्मों से संबंध होने के कारण दोनों परिवार इस रिश्ते के खिलाफ थे। विरोध बढ़ने पर दोनों दिसंबर 2023 में दिल्ली चले गए और 6 दिसंबर को शाहदरा जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में विधिसम्मत विवाह कर लिया।

दंपती का आरोप था कि विवाह के बाद उन्हें लगातार परिवार की ओर से धमकियां मिल रही थीं। उन्होंने ऑनर किलिंग की आशंका भी जताई और कहा कि उन्हें झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दी जा रही है। पुलिस से सुरक्षा की मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कहा गया कि धमकियों से जुड़े आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं, इसलिए याचिका स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया।

अपने आदेश में अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रत्येक नागरिक को प्राप्त है और अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करना इसी अधिकार का हिस्सा है।

खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित Lata Singh vs State of Uttar Pradesh मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले कदम हैं। ऐसे विवाह सामाजिक और जातीय भेदभाव को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हाईकोर्ट ने संबंधित पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी को निर्देश दिया कि दंपती के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यदि भविष्य में दंपती किसी भी प्रकार की शिकायत दर्ज कराते हैं तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए और आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।

अदालत ने परिजनों को भी स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें दंपती के शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि परिवार को विवाह से असहमति हो सकती है, लेकिन इसके आधार पर धमकी, उत्पीड़न या हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

इस फैसले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वयस्कों के वैवाहिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।