35 साल की नौकरी पर मंडराया खतरा! आबकारी अफसर के जाति प्रमाणपत्र का ऐसा राज खुला कि पहुंच गया मामला हाईकोर्ट

स्वतंत्र बोल
बिलासपुर 20 मई 2026:आबकारी विभाग के एक बड़े अधिकारी की नौकरी अब खतरे में पड़ती नजर आ रही है। 35 साल से सरकारी सेवा कर रहे अधिकारी पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र के जरिए नौकरी हासिल करने का गंभीर आरोप लगा है। मामला इतना बढ़ गया कि अब हाईकोर्ट को दखल देना पड़ा है। जांच में जो शुरुआती बातें सामने आई हैं, उन्होंने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

ad

मामला अतिरिक्त आबकारी आयुक्त राजेश हेनरी से जुड़ा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की और वर्षों तक उसका लाभ लेते रहे। इस पूरे मामले को लेकर भोपाल निवासी प्रभात पांडे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

youtube

याचिका में बताया गया है कि इस संबंध में 22 जून 2024 को शिकायत की गई थी, लेकिन मामला लंबे समय से बिलासपुर की जिला स्तरीय जाति सत्यापन समिति के पास लंबित पड़ा हुआ है। आरोप है कि शिकायत के बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ाई गई।

सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज निकाले गए। जानकारी में पता चला कि अधिकारी के जाति प्रमाणपत्र पर बिलासपुर तहसील की सील और हस्ताक्षर मौजूद हैं। लेकिन जब तहसील कार्यालय के साल 1990-91 के दायरा पंजी की जांच की गई तो वहां उस प्रमाणपत्र से जुड़ा कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि छत्तीसगढ़ की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने पहले ही इस प्रमाणपत्र को जांच के लिए जिला स्तरीय समिति के पास भेज दिया था, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।

याचिका में मांग की गई थी कि जांच को तय समय सीमा में पूरा कराया जाए, क्योंकि देरी होने से सत्यापन प्रक्रिया का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी को आरक्षण के लाभ से दूर रखने और प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा कि जब शिकायत सक्षम प्राधिकारी के पास लंबित है, तो उसका निराकरण उचित समय के भीतर होना चाहिए। हाईकोर्ट ने जिला स्तरीय समिति को सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए तय समय सीमा में जांच पूरी कर फैसला देने के निर्देश दिए हैं।

अब सबकी नजर इस जांच पर टिकी है, क्योंकि अगर आरोप सही साबित हुए तो 35 साल पुरानी नौकरी पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।