स्वतंत्र बोल
खैरागढ़, 19 मई 2026: छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े और गैस कालाबाजारी की आशंका ने सनसनी फैला दी है। मामला बाजार आतरिया क्षेत्र की साल्हेकला इंडियन गैस एजेंसी से जुड़ा है, जहां उपभोक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनसे OTP लेकर सिस्टम में सिलेंडर डिलीवर दिखा दिया जाता है, लेकिन गैस उनके घर तक पहुंचती ही नहीं।
ग्रामीणों का दावा है कि एजेंसी कर्मचारी पहले फोन या संपर्क कर OTP मांगते हैं। उपभोक्ता जैसे ही OTP बताते हैं, सिस्टम में सिलेंडर की डिलीवरी पूरी दिख जाती है और कुछ समय बाद खाते में सब्सिडी की राशि भी पहुंच जाती है। लेकिन असली सिलेंडर कई-कई दिनों तक नहीं आता। कई लोगों ने आरोप लगाया कि उनके खाते में दो-दो और तीन-तीन बार सब्सिडी आई, लेकिन गैस सिलेंडर कभी नहीं मिला।
इस पूरे मामले ने गैस वितरण व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए OTP आधारित डिलीवरी सिस्टम लागू किया था, लेकिन अब उसी सिस्टम के जरिए कथित फर्जी डिलीवरी दिखाने का खेल होने की आशंका जताई जा रही है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत करने पर एजेंसी हर बार नया बहाना बनाकर मामला टाल देती है। कभी गाड़ी रास्ते में होने की बात कही जाती है, कभी अगले दिन सप्लाई का भरोसा दिया जाता है, तो कभी लोडिंग नहीं होने का बहाना बनाकर लोगों को वापस भेज दिया जाता है।
सूत्रों के मुताबिक मामला सिर्फ फर्जी एंट्री तक सीमित नहीं हो सकता। आरोप यह भी हैं कि गरीब उपभोक्ताओं के नाम पर बुक घरेलू सिलेंडरों को होटल, ढाबों और छोटे व्यवसायों में खपाया जा रहा है। घरेलू गैस को कमर्शियल उपयोग में बेचकर मोटा मुनाफा कमाने की आशंका जताई जा रही है। यही वजह बताई जा रही है कि रिकॉर्ड में गैस डिलीवर दिख रही है, लेकिन गांवों के घरों तक सिलेंडर नहीं पहुंच पा रहा।
साल्हेकला एजेंसी सीमावर्ती इलाके में होने के कारण खैरागढ़ के अलावा बेमेतरा और दुर्ग जिले के भी बड़ी संख्या में उपभोक्ता इससे जुड़े हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब 800 से 900 परिवार इस कथित गड़बड़ी से प्रभावित हो सकते हैं। लोगों का कहना है कि अगर डिलीवरी रिकॉर्ड, OTP एंट्री, वाहन मूवमेंट और वास्तविक सप्लाई की तकनीकी जांच कराई जाए तो बड़ा खुलासा सामने आ सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि जब उपभोक्ताओं के घर सिलेंडर पहुंचा ही नहीं तो सिस्टम में डिलीवरी पूरी कैसे दिख गई? आखिर किस आधार पर सब्सिडी जारी हो गई? क्या विभाग सिर्फ ऑनलाइन रिकॉर्ड देखकर ही संतुष्ट हो जाता है?
फिलहाल जिम्मेदार अधिकारी कैमरे पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं। हालांकि खैरागढ़ एडीएम सुरेंद्र कुमार ठाकुर ने मामले की जांच के निर्देश दिए जाने की बात कही है। अब सबकी नजर इस जांच पर टिकी है कि आखिर गैस सिलेंडरों का यह खेल लापरवाही है या फिर किसी बड़े सिंडिकेट की साजिश।


