गांव-गांव पहुंच रहीं ‘बीमा सखियां’… बदल रही महिलाओं की किस्मत, अब घर बैठे मिल रहा रोजगार

स्वतंत्र बोल
रायपुर, 14 मई 2026:
  छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की तस्वीर तेजी से बदल रही है। जिन महिलाओं के लिए कभी घर की चौखट पार करना मुश्किल माना जाता था, आज वही महिलाएं गांव-गांव घूमकर लोगों को बीमा और आर्थिक सुरक्षा का पाठ पढ़ा रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू हुई ‘एलआईसी बीमा सखी योजना’ अब ग्रामीण महिलाओं के लिए नई पहचान बनती जा रही है।

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9 दिसंबर 2024 से शुरू हुई यह योजना सिर्फ रोजगार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज में मजबूत पहचान दिलाने का बड़ा माध्यम बन चुकी है। इस योजना के तहत 10वीं पास महिलाओं को एलआईसी एजेंट के रूप में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में बीमा सेवाएं उपलब्ध करा सकें।

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सरकार की इस पहल की सबसे खास बात यह है कि प्रशिक्षण के दौरान भी महिलाओं की आय बंद नहीं होती। पहले वर्ष में 7 हजार रुपए, दूसरे वर्ष में 6 हजार और तीसरे वर्ष में 5 हजार रुपए तक का मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। इसके साथ पॉलिसी बेचने पर अलग से कमीशन भी मिल रहा है, जिससे महिलाओं की कमाई लगातार बढ़ रही है।

ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को इस योजना से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से “बीमा सखी” के रूप में चयनित महिलाओं को एजेंट कोड दिया जा रहा है। इसके बाद वे गांव-गांव जाकर लोगों को बीमा योजनाओं की जानकारी दे रही हैं और वित्तीय जागरूकता बढ़ा रही हैं।

इस योजना की सफलता की सबसे बड़ी मिसाल ग्राम पंचायत जमुवाटाड़ की रहने वाली सत्यवंती बनकर सामने आई हैं। गरिमा स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने प्रशिक्षण लिया और बीसी सखी व बीमा सखी के रूप में काम शुरू किया। आज वे ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं देने के साथ जीवन बीमा के प्रति जागरूक कर रही हैं।

सिर्फ पांच महीनों में करीब 70 हजार रुपए की आय अर्जित कर सत्यवंती ने न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गईं। उनकी सफलता अब आसपास के गांवों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

सरकार का दावा है कि बीमा सखी योजना के जरिए ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है और महिलाओं के लिए कमाई के स्थायी अवसर तैयार हो रहे हैं। पारदर्शी चयन प्रक्रिया, तय भुगतान व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण के कारण महिलाओं का भरोसा भी इस योजना पर तेजी से बढ़ रहा है।

बीमा सखी योजना अब सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास और बदलती तस्वीर की नई पहचान बनती जा रही है।