स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली, 28अप्रैल 2026। देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि जानलेवा खतरे का रूप लेती जा रही है। बढ़ते तापमान और हीटवेव के असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त एडवाइजरी जारी की है। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि यदि समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सबसे ज्यादा असर श्रमिकों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ सकता है।
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केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने अपने निर्देश में विशेष रूप से उन श्रमिकों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो खुले में या श्रम-प्रधान कामों में लगे हुए हैं। मंत्रालय ने राज्यों को स्पष्ट कहा है कि तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाए जाएं।
एडवाइजरी में सबसे अहम निर्देश काम के समय में बदलाव को लेकर दिया गया है। राज्यों से कहा गया है कि कंपनियां, फैक्ट्रियां और कंस्ट्रक्शन साइट्स अपने काम के घंटे इस तरह तय करें कि मजदूरों को दोपहर की तेज धूप में काम न करना पड़े। इसके साथ ही कार्यस्थलों पर पीने के साफ पानी, आराम के लिए छायादार जगह और ठंडक के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि जहां जरूरत हो, वहां आइस पैक और हीट से बचाव के अन्य जरूरी साधन उपलब्ध कराए जाएं। श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने और स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। खासतौर पर फैक्ट्री और खदानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए काम की रफ्तार कम रखने, अधिक ब्रेक देने और बेहतर वेंटिलेशन की व्यवस्था करने को अनिवार्य बताया गया है।
एडवाइजरी में कंस्ट्रक्शन वर्कर्स, ईंट-भट्ठा मजदूर और दिहाड़ी कामगारों को सबसे अधिक संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। सरकार ने निर्देश दिया है कि इन वर्गों के लिए विशेष निगरानी और सुरक्षा उपाय किए जाएं, ताकि हीट स्ट्रोक जैसी खतरनाक स्थितियों से बचाव हो सके।
इसके अलावा, लेबर चौक और सार्वजनिक स्थानों पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। पोस्टर और बैनर के जरिए लोगों को लू से बचाव के तरीके और आपातकालीन संपर्क जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। ईएसआईसी अस्पतालों और डिस्पेंसरी में हीट स्ट्रोक से निपटने के लिए विशेष हेल्प डेस्क बनाने, ORS और जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।
सरकार का मानना है कि समय पर उठाए गए ये कदम न सिर्फ श्रमिकों की सेहत को सुरक्षित रखेंगे, बल्कि कामकाज पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को भी कम करेंगे। फिलहाल बढ़ती गर्मी के बीच यह एडवाइजरी राज्यों के लिए चेतावनी भी है और एक सख्त निर्देश भी, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
