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रायपुर, 09 अप्रैल 2026। स्वास्थ्य सेवाओं की दुनिया में एक बड़ा बदलाव चुपचाप आकार ले रहा है, और इसकी आहट अब खुलकर सामने आने लगी है। दवाइयों, रिसर्च और मेडिकल सिस्टम के पीछे चल रही इस नई दिशा ने विशेषज्ञों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी उत्सुकता और सवाल दोनों पैदा कर दिए हैं।
राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित “फार्मा अन्वेषण 2026” कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस आयोजन में फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के बीच बढ़ते तालमेल को लेकर गहन चर्चा हुई।
कार्यक्रम की थीम “Future Pharma Ecosystem: Academia, Industry, Research, Regulatory and Practice” रही, जिसने साफ संकेत दिए कि आने वाले समय में दवाइयों का निर्माण, रिसर्च और उनका उपयोग पूरी तरह नए ढंग से बदल सकता है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि फार्मेसी क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ है और इसमें हो रहे बदलाव सीधे लोगों के इलाज और जीवन पर असर डालेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अब सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि फार्मेसी शिक्षा और रिसर्च को मजबूत कर पूरे स्वास्थ्य तंत्र को नई दिशा देने की तैयारी में है।
कार्यक्रम में इंडस्ट्री और एकेडमिक विशेषज्ञों के बीच संवाद, पेटेंट और इनोवेशन शोकेस, ओरल और पोस्टर प्रेजेंटेशन जैसे कई सत्र आयोजित किए गए। इसमें छात्रों और शोधार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे यह साफ हो गया कि नई पीढ़ी इस बदलाव का हिस्सा बनने के लिए तैयार है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह बदलाव आम लोगों तक सस्ती और बेहतर दवाइयों के रूप में पहुंचेगा, या फिर यह केवल बड़े संस्थानों और उद्योगों तक ही सीमित रह जाएगा?
फिलहाल, “फार्मा अन्वेषण 2026” ने यह जरूर साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन आने वाला है—और इसकी शुरुआत अब हो चुकी है।
