जलाशय, जंगल और रहस्यमयी मधेश्वर पर्वत के बीच उभरता पर्यटन हब, मयाली नेचर कैंप पहुंचते ही बदला माहौल, मंत्री के दौरे ने खोले बड़े संकेत

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रायपुर, 9 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में घने जंगलों और शांत जलाशय के बीच बसा मयाली नेचर कैंप इन दिनों अचानक चर्चा का केंद्र बन गया है। प्राकृतिक सुंदरता के साथ यहां का रहस्यमयी वातावरण और आध्यात्मिक आभा लोगों को अपनी ओर खींच रही है। लेकिन इसी बीच इस स्थान पर हुई एक खास हलचल ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

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इसी मयाली नेचर कैंप का जायजा लेने पहुंचे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने यहां की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। सघन वनों और विशाल जलाशय के बीच बसे इस कैंप में पहुंचते ही माहौल पूरी तरह बदलता नजर आता है—जहां एक ओर प्रकृति की शांति है, वहीं दूसरी ओर मधेश्वर पर्वत की मौजूदगी इस स्थान को एक अलग ही रहस्य और आस्था से जोड़ देती है।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने आवास, स्वच्छता, भोजन और साहसिक गतिविधियों की व्यवस्था को परखा और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि मयाली जैसे स्थान सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान बन सकते हैं, यदि इन्हें सही तरीके से विकसित किया जाए।

इस दौरान मंत्री ने जलाशय में बोटिंग का आनंद भी लिया, लेकिन आसपास के घने जंगल और सन्नाटा इस अनुभव को और भी अलग बनाता है। यहां की हरियाली, ठंडी हवा और गूंजती प्राकृतिक ध्वनियां एक ऐसा माहौल तैयार करती हैं, जो पर्यटकों को भीतर तक प्रभावित कर देता है।

मयाली नेचर कैंप में टेंट हाउस, कुटीर, ट्रेकिंग और स्थानीय व्यंजनों की सुविधा उपलब्ध है, वहीं मधेश्वर पर्वत आस्था और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह स्थान न सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जा रहा है, बल्कि यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा भी लोगों को अपनी ओर खींच रही है।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यहां मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाए, स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाए और इस स्थल का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

अब सवाल यह है कि क्या मयाली नेचर कैंप आने वाले समय में देश का बड़ा पर्यटन हब बनेगा, या फिर इसके पीछे छुपा यह रहस्यमयी आकर्षण ही लोगों को यहां खींचता रहेगा। फिलहाल, जंगलों के बीच बसे इस शांत स्थल की हलचल ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।