स्वतंत्र बोल
रायपुर, 09 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां तकनीक और भविष्य की ताकत सीधे कक्षाओं में उतरने जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बीच राज्य में एक बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रयोग शुरू हुआ है, जिसने शिक्षा जगत में उत्साह के साथ-साथ कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
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राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से Google India के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुलाकात की। इस दौरान शिक्षा में AI के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत चर्चा हुई और राज्य में “AI सक्षम शिक्षा अभियान” की शुरुआत का रोडमैप तैयार किया गया।
इस पहल के तहत रायपुर जिले को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है, जहां स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षण पद्धतियों को लागू किया जाएगा। “सक्षम शिक्षक अभियान” के माध्यम से राज्य के शिक्षकों को डिजिटल टूल्स और AI तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे बदलते समय के साथ कदम मिला सकें।
सरकार का लक्ष्य है कि इस अभियान के जरिए 2 लाख से अधिक शिक्षकों को AI प्रमाणन दिया जाए। इसके लिए गूगल फॉर एजुकेशन अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को निःशुल्क उपलब्ध कराएगा, जिससे शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा सके। शुरुआती चरण में 200 शिक्षकों के साथ विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जहां उन्हें AI टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पहल को राज्य के भविष्य के लिए निर्णायक कदम बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा में AI का समावेश केवल एक प्रयोग नहीं, बल्कि छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा बदलाव है। उनके अनुसार, इससे शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों में नए युग के कौशल विकसित होंगे।
हालांकि, विशेषज्ञों के बीच इस पहल को लेकर एक अलग तरह की बहस भी शुरू हो गई है। क्या AI आधारित शिक्षा पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों को पूरी तरह बदल देगी? क्या भविष्य में शिक्षक की भूमिका सीमित हो जाएगी? ऐसे कई सवाल हैं जो इस बड़े बदलाव के साथ सामने आ रहे हैं।
सरकार का कहना है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल इंडिया के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाना है।
अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह AI प्रयोग छत्तीसगढ़ के स्कूलों में किस तरह का बदलाव लाता है—क्या यह शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा या फिर इसके असर से जुड़ी आशंकाएं भी सच साबित होंगी।
