स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 04 अप्रैल 2025 : इस्लाम धर्म के मुताबिक फिरौन वो शख्स है जिसे दुनिया बका हर मुसलमान नफरत की नजर से देखता है। इस शख्स के मरने के बाद भी इसकी लाश एक ताबूत में कैद है।
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जानकारी के मुताबिक फ़िरौन की लाश का आज भी सुरक्षित होना एक ऐतिहासिक और वैज्ञानिक तथ्य है, जिसे कई लोग कुरान और बाइबिल में वर्णित घटनाओं से जोड़ते हैं। वहीं आपको बता दें इस्लाम धर्म के लोग फिरौन को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं। आइए जान लेते हैं कि ये कौन है और इस्लाम धर्म के लोग इससे इतनी नफरत क्यों करते हैं।
- इस तरह हुई फिरौन की मौत
- मुसलमान फिरौन से नफरत क्यों करते हैं?
इस तरह हुई फिरौन की मौत
मिस्र के कुछ प्राचीन फिरऔनों की ममी आज भी संग्रहालयों में सुरक्षित हैं। खासकर, माना जाता है कि रमसेस II या मर्नप्तह वो फिरौन हो सकता है, जिसका जिक्र हज़रत मूसा की कहानी में आता है। जब फिरौन ने मूसाऔर बनी इस्राईल कोम का पीछा किया, तो वो और उसकी सेना लाल सागर में डूब गई। जिसके कारण उसकी मौत हो गई। इस्लाम धर्म के मुताबिक कहा जाता है कि फिरौन की लाश को आज भी ममी बनाकर सुरक्षित रखा गया। ऐसा इसलिए ताकि लोगों को पता चल सके कि बुरा करने वालों का अंजाम बुरा होता है।
मुसलमान फिरौन से नफरत क्यों करते हैं?
इस्लाम धर्म के लोग फिरौन से बेहद नफरत करते हैं। मुसलमान फिरौन को एक अत्याचारी और घमंडी शासक मानते हैं, जिसने खुद को भगवान घोषित कर दिया था और हज़रत मूसा और उनकी क़ौम पर अत्याचार किए थे। उसने अल्लाह के आदेशों की अवहेलना की और डूबकर मारा गया। वहीँ आज माना जाता है कि फिरौन की लाश ममी काहिरा, मिस्र के मिस्र संग्रहालय में रखी गई है। इस पर वैज्ञानिक शोध भी किए गए हैं, जिससे पता चलता है कि उसकी मृत्यु डूबने या अचानक आघात से हुई हो सकती है।
