स्वतंत्र बोल
रायपुर,20 अप्रैल 2026। जनगणना की पारंपरिक प्रक्रिया अब तेजी से बदल रही है और इसके पीछे एक ऐसा डिजिटल बदलाव चल रहा है, जो आने वाले समय में प्रशासन की पूरी तस्वीर बदल सकता है। छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 के तहत शुरू की गई डिजिटल स्व-गणना प्रक्रिया ने लोगों को सीधे इस अभियान का हिस्सा बना दिया है।
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ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 19,039 नागरिकों ने खुद अपनी जानकारी दर्ज कर स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जबकि 7,734 लोगों ने पंजीकरण कर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस तरह कुल 26,773 नागरिक इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं, जो इस नई व्यवस्था के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
यह पहल भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के समन्वय में चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य सटीक और भरोसेमंद आंकड़े जुटाना है। इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य की योजनाएं और नीतियां तय की जाएंगी, जिससे विकास कार्यों को और ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके।
स्व-गणना प्रणाली की खास बात यह है कि इसमें नागरिक खुद अपनी जानकारी दर्ज करते हैं, जिससे डेटा की प्रामाणिकता बढ़ती है और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होती है। इसके लिए नागरिकों को ओटीपी के माध्यम से लॉगिन करना होता है और फिर परिवार से जुड़ी आवश्यक जानकारियां भरनी होती हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक डिजिटल संदर्भ संख्या दी जाती है, जो आगे सत्यापन में काम आएगी।
इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए राज्य में प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही तकनीकी सहायता के लिए हेल्पलाइन सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान हो सके।
सबसे अहम बात यह है कि डेटा सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है। सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रखी जा रही हैं और निर्धारित नियमों के तहत ही उनका उपयोग किया जाएगा।
अब सवाल यह है कि क्या यह डिजिटल जनगणना भविष्य में पूरी तरह पारंपरिक तरीके की जगह ले लेगी, या फिर दोनों के बीच संतुलन बनाकर एक नई प्रणाली विकसित की जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि लोग अब सिर्फ गिने नहीं जा रहे, बल्कि खुद अपनी पहचान दर्ज कर रहे हैं—और यही बदलाव सबसे बड़ा संकेत दे रहा है।
