स्वतंत्र बोल
उत्तर प्रदेश , 15 मई 2025 : उत्तर प्रदेश में अब दिव्यांग और सामान्य बच्चे एक ही स्कूल में साथ पढ़ेंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार प्रदेश में समावेशी शिक्षा प्रणाली को तेजी से बढ़ावा दे रही है, जिसका मकसद है – हर बच्चे को बराबरी का अधिकार और सम्मान देना, चाहे वह शारीरिक रूप से अक्षम हो या सामान्य.
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अब तक दिव्यांग बच्चों के लिए अलग स्कूल बनाए जाते थे. लेकिन इस नई पहल के तहत, सामान्य और दिव्यांग छात्र एक ही छत के नीचे, एक साथ पढ़ाई कर रहे हैं. सरकार ने औरेया, लखनऊ, कन्नौज, प्रयागराज, आजमगढ़, बलिया और महराजगंज में समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय शुरू किए हैं. इन स्कूलों में अब तक 325 बच्चों का नामांकन हो चुका है.
सामान्य बच्चों के साथ पढ़ाई
यहां दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित, अस्थिबाधित और सामान्य बच्चे एक साथ पढ़ाई कर रहे हैं. स्पेशल टीचर, ब्रेल किताबें, श्रवण यंत्र, व्हीलचेयर, रैम्प, डिजिटल लर्निंग टूल्स और अन्य सहायक सुविधाएं इन स्कूलों को आधुनिक और दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाती हैं.
आत्मविश्वास बढ़ेगा
योगी सरकार का मानना है कि सिर्फ अलग स्कूल बनाने से दिव्यांगों का भला नहीं होगा. जब वे सामान्य बच्चों के साथ पढ़ेंगे, खेलेंगे और संवाद करेंगे, तभी उनमें आत्मविश्वास और समाज से जुड़ाव बढ़ेगा. इससे भेदभाव की दीवारें टूटेंगी और समाज में समानता और समावेशिता की भावना मजबूत होगी.
सम्मान और अवसर का जरिया
राज्य के पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि यह योजना दिव्यांगजनों को सहानुभूति नहीं, सम्मान और अवसर देने का जरिया है. सरकार का लक्ष्य है कि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में हो.
बढ़ेगी संख्या
इन स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है. गाजियाबाद में नया स्कूल बनने की प्रक्रिया में है, जबकि मीरजापुर, एटा, प्रतापगढ़, वाराणसी और बुलन्दशहर में निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है.
यूपी ने की शुरुआत
पृष्ठभूमि में नजर डालें तो, देश में समावेशी शिक्षा की बात तो वर्षों से हो रही है, लेकिन जमीन पर ऐसे प्रयास कम ही नजर आए हैं. उत्तर प्रदेश में यह पहली बार है जब इस सोच को व्यवहार में लाया गया है. यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों से भी मेल खाती है, जिसमें सभी बच्चों को समान और समावेशी शिक्षा देने की बात कही गई है
बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना उद्देश्य
योगी सरकार की यह योजना दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने, उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
