स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 15 अक्टूबर 2026: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) कराने की तैयारी की है। आयोग ने संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है। इस प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 की कट-ऑफ तारीख तय की गई है।
इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा भी शामिल हैं। इन पांच राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं को इसमें शामिल करना है।
यूपी समेत पांच राज्यों में 2027 में चुनाव
उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा। वहीं, मणिपुर की 60, गोवा की 40, पंजाब की 117 और उत्तराखंड की 70 सदस्यीय विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले चुनाव कराने की अनुमति है।
SIR और SSR में क्या अंतर है?
विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना और सामान्य सुधार करना है। उदाहरण के लिए, यदि कोई मतदाता अपना घर बदलता है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पता अपडेट करा सकता है।
इसके विपरीत, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) एक व्यापक प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाता है। मतदाता सूची में दर्ज जानकारियों की जांच की जाती है और पात्रता से जुड़े विवरणों का मिलान किया जाता है।
SIR के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मतदाताओं के पते पर जाकर यह सत्यापित कर सकते हैं कि संबंधित व्यक्ति वहां रहता है या नहीं। इस प्रक्रिया में नए पात्र मतदाताओं की पहचान करने पर भी ध्यान दिया जाता है।
SIR को लेकर क्यों है विवाद?
SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस दौरान पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने या कुछ नागरिकों के मतदाता सूची से बाहर रह जाने का खतरा हो सकता है।
विपक्ष ने दस्तावेजों की जरूरत और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई है। उसके मुताबिक, प्रवासी मजदूरों, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को इस प्रक्रिया में परेशानी हो सकती है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना है। आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया में दोहरी प्रविष्टियों और अयोग्य लोगों के नाम हटाने के साथ यह सुनिश्चित करने पर भी जोर है कि सभी पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल रहें।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
SIR को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। कुछ याचिकाओं में पुनरीक्षण की प्रक्रिया और उसके तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई और प्रक्रिया पर नजर रहेगी।


