निकाय चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर विवाद, बघेल ने क्या रखीं मांगें?

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स्वतंत्र बोल
रायपुर 29 अक्टूबर 2026 :
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दुर्ग जिले की नगरीय निकाय मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। गुरुवार को भिलाई में प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने दावा किया कि बिना परिसीमन के सैकड़ों मतदाताओं के बूथ और वार्ड बदल गए हैं। बघेल ने मतदाता सूची दोबारा अपडेट करने, दावा-आपत्ति की तारीख बढ़ाने और गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।

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बघेल ने कहा कि इस साल के अंत में दुर्ग जिले के भिलाई नगर निगम, भिलाई चरोदा और रिसाली नगर निगम के साथ जामुल और अहिवारा पालिका में भी चुनाव होने हैं। उनके मुताबिक, मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद जिला अध्यक्षों को सौंपी गई सूची में कई गड़बड़ियां मिली हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी निकायों में मतदाताओं के बूथ और वार्ड बदल गए हैं। इससे चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।

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दावा-आपत्ति की तारीख बढ़ाने की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदाता सूची जारी होने के दूसरे दिन यह सूची जिला अध्यक्षों को मिली। उनके अनुसार, दावा-आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर है, लेकिन इस दौरान वार्डों में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) नहीं बैठे। बघेल ने कहा कि इससे लोगों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने में परेशानी हुई और इस संबंध में शिकायतें भी मिली हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि बीएलओ वार्डों में बैठने के बजाय नगर निगम कार्यालय में मतदाता सूची सुधारने का काम कर रहे हैं। बघेल ने इसे मतदाता सूची में गड़बड़ी का संकेत बताया।

भूपेश बघेल ने रखीं तीन मांगें

भूपेश बघेल ने मतदाता सूची के मामले में तीन मांगें रखीं।

  • मतदाता सूची दोबारा अपडेट हो: उन्होंने कहा कि बिना परिसीमन के सैकड़ों मतदाताओं के वार्ड बदलने के मामले की जांच कर सूची में सुधार किया जाना चाहिए।
  • दावा-आपत्ति की तारीख बढ़े: बघेल ने कहा कि लोगों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय मिलना चाहिए।
  • जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो: उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले सरकारी अधिकारी या अन्य व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

ये आरोप और मांगें भूपेश बघेल ने प्रेसवार्ता में रखीं। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और बीएलओ की भूमिका को लेकर संबंधित अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।