राहुल गोस्वामी
बीजेपी ने लंबे समय बाद संगठन में बड़ा फेरबदल किया। एक साथ देशभर के 24 राज्यों के संगठन से जुड़े पदाधिकारियों को बदल दिया। नीतिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी की कुर्सी खाली था, जिसमे पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ का प्रदेश प्रभारी बनाया गया। उनके सहयोग के लिए बिहार के बीजेपी नेता और राष्ट्रीय मंत्री सिद्धार्थ शंभु को सह प्रभारी बनाकर नितिन नबीन ने अपनी पकड़ मजबूत रखा है। दरअसल नीतिन नबीन विगत पांच वर्षो तक छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी रहे, उन्होंने सत्ता में वापसी के लिए जी तोड़ मेहनत किया था। उनकी बनाई रणनीति का परिणाम था कि बीजेपी ने सत्ता में वापसी की, विपक्ष में रहते नीतिन नबीन ने प्रदेश के कोना-कोना को छान मारा था। एक एक जिलाध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्षों से उनका सीधा संपर्क था। वे छत्तीसगढ़ के बीजेपी नेताओ को बेहतर तरीके से जानते है, राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अपने सहयोगी रहे सिद्धार्थ शंभु को सह प्रभारी बनाकर अपनी पकड़ मजबूत रखा है।
छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन के मजबूत स्तंभ रहे पवन साय और अजय जामवाल की विदाई हो गई है। पवन साय मूलतः जशपुर जिले के सिरिमकेला गाँव के रहवासी है, विभाग प्रचारक के बाद सीधे उन्हें संगठन की कमान सौपा गया था। श्री साय साल 2016 से संगठन महामंत्री का दायित्व संभाल रहे थे, इस दौरान प्रदेश में विधासनभा और लोकसभा चुनाव भी हुए। साल 2018 में बीजेपी चुनाव हार गई और जिसे दोबारा सत्ता में लाना बड़ी चुनौती थी। साल 2020 में हिमांचल निवासी प्रचारक अजय जामवाल को क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर भेजा गया था। पवन साय को झारखंड में बीजेपी संगठन महामनट्री बनाया गया तो अजय जामवाल को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी दी गई। झारखंड में साल 2022 से बीजेपी संगठन महामंत्री का काम संभाल रहे कर्मवीर सिंह को छत्तीसगढ़ बीजेपी की जिम्मेदारी दी गई। बीजेपी ने आमूलचूल परिवर्तन कर दिया है।
पवन साय-जामवाल की विदाई, कर्मवीर को कमान
पवन साय साल 2016 से संगठन महामंत्री का दायित्व संभाल रहे थे, इस दौरव छत्तीसगढ़ भाजपा में अनेक परिवर्तन हुए। पार्टी चुनाव हारी, विपक्ष में रहते सरकार के खिलाफ जोरदार माहौल बनाया और साल 2023 में भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया। पवन की जगह कर्मवीर सिंह को छत्तीसगढ़ बीजेपी संगठन को संभालने की चुनौती होगी। कर्मवीर मूलतः उत्तरप्रदेश के मथुरा का रहवासी है, साल 1993 से आरएसएस के प्रचारक के रूप में काम कर रहे है। उत्तर प्रदेश के दो संघ प्रांतो के प्रान्त प्रचारक रहे चुके है। साल 2022 में उन्हें झारखंड में बीजेपी संगठन का काम सौपा था, तब से सितंबर 2026 तक वे संगठन को संवारने में लगे रहे। कर्मवीर के सामने छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की होगी।
पवन के विदाई की वजह ?
राजनीतिक गलियारों में चली चर्चाओं अनुसार साल 2023 में बीजेपी की सरकार में वापसी के बाद पवन साय की सक्रियता बढ़ गई थी। पांच सालो तक विपक्ष रहे बीजेपी के देवतुल्य कार्यकर्ताओ को सत्ता और संगठन से अपेक्षाएं थी, पर वह साल भर बाद ही नाराजगी में बदलने लगी। धीरे धीरे बीजेपी के कार्यकर्ताओ में सुनवाई ना होने, और अन्य कारणों से सत्ता के साथ संगठन से नाराजगी बढ़ने लगी थी। बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें 50 से अधिक सीटों का चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी सौपा था, परिणाम पक्ष में आने पर उन्हें संगठन शिल्पी का नाम दिया दिया गया। बताते है कि उसके बाद से पवन साय ने संगठन का काम लगभग बंद कर दिया था। दरअसल सरकार और संगठन के बीच किसी बातो को लेकर सामंजस्य का अभाव था, सरकार की संगठन से अपेक्षायें रहती पर संगठन अन्य कामो में उलझे रहते। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओ में नाराजगी बढ़ रही थी न। अंदरूनी चर्चाओं अनुसार पवन साय ने सरकार के समानांतर एक अलग व्यवस्था बना लिया था, उनके करीबी दर्जन भर लोग उसमे शामिल थे, जिससे सरकार में बैठे लोग असहज महसूस कर रहे थे।
प्रदेश भर कार्यकर्ताओ का इस्तीफा-
संगठन और सरकार से व्यवहार से नाराज कार्यकर्ताओ ने प्रदेश भर के अलग अलग जिलों में इस्तीफा देना प्रारंभ कर दिया था। लोकसभा चुनाव के बाद जुलाई 2024 में धमतरी में भाजपा के नाराज कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफे दिया। जुलाई 2025 में नारायणपुर जिले के भाजपा जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सामूहिक इस्तीफा देने की बात कही। पदाधिकारी जिला प्रशासन के अधिकारियो से नाराज थे। सितंबर 2025 में धमतरी जिले के कार्यकर्ताओ ने भ्रष्टाचार से नाराज थे, सत्ता संगठन तक बाते पहुंचाई पर निराकरण नहीं हुआ तो धमतरी के भाजपा कार्यालय में जिलाध्यक्ष के नाम 400 कार्यकर्ताओ ने इस्तीफा सौप दिया। भिलाई भाजपा में युवा मोर्चा की कार्यकारिणी को लेकर दो अलग-अलग सूचियां सामने आईं। इससे कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय पहुंचे , मामला संगठन के भीतर चल रही खींचतान तक पहुंच गया। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ शहर मंडल में 111 भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा देने की घोषणा की। इस्तीफा देने वालों में मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के वर्तमान और पूर्व पदाधिकारी, मोर्चा-प्रकोष्ठों के सदस्य, पूर्व पार्षद, बूथ अध्यक्ष और सक्रिय कार्यकर्ता शामिल थे।
इस्तीफा पत्र में मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नोआना पर परिवारवाद, गुटबाजी और पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के आरोप लगाए गए। पूर्व विधायक एवं प्रदेश उपाध्यक्ष रामजी भारती के प्रभाव में मंडल अध्यक्ष के काम करने का आरोप भी लगाया गया। इसके बाद 1 अगस्त तक डोंगरगढ़ में 25 और कार्यकर्ताओं के इस्तीफे की खबर सामने आई। इस तरह इस्तीफा देने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की संख्या 136 तक पहुंच गई। भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रवि भगत को पार्टी से निकाल दिया गया।
वीडियो कांड से हंगामा-
दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का एक (AI) निर्मित, एनिमेटेड वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। वीडियो में छत्तीसगढ़ बीजेपी के तत्कालीन प्रभारी नीतिन नबीन को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से 1500 करोड़ रुपये की मांग करते दिखाया गया था। इस वीडियो के बाद हंगामा मच गया, आनन फानन में रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा ने सिविल लाइन पुलिस थाना में अज्ञात लोगो पर FIR कराया था। वीडियो के जरिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव व विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, संगठन महामंत्री पवन साय और कोषाध्यक्ष राम गर्ग की छवि खराब करने की कोशिश की गई थी। वीडियो में दावा किया गया था कि यह 1500 करोड़ रुपये का कलेक्शन पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के लिए किया जा रहा है। पुलिस ने जाँच पड़ताल की वीडियो बनाने वाले बीजेपी की सोशल मीडिया टीम से जुड़े मिले। अंकित दुबे, आकाश जोशी, जावेद, यश का नाम सामने आया था। पुलिस ने कुल पांच लोगो को गिरफ्तार किया था। जाँच के बाद पुलिस ने इस घटना के लिए एनएसयूआई के पदाधिकारी असलम मिर्जा को मास्टर माइंड बताया था। इस वीडियो ने सरकार और संगठन के बीच चल रहे मतभेदों को उजागर कर दिया था।
स्मृति- सिद्धार्थ और कर्मंवीर की चुनौती-
सरकार में होने के बाद भी बीजेपी कार्यकर्ताओ में नाराजगी होना, सरकार और संगठन दोनों के लिए ठीक नहीं है। प्रदेश भर हजारो कार्यकर्ताओ ने इस्तीफा दिया, उन्हें मनाने और समझाने का प्रयास भी नहीं हुआ। सरकार दिसंबर में तीन साल पूरा कर लेगी और चुनाव के तरफ कदम आगे बढ़ा रही है ऐसे म असंतुष्ट और नाराज कार्यकर्ताओ को साधना बड़ी चुनौती होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सौम्यता और सरल छवि का फायदा प्रशासनिक अधिकारियो ने उठाया, उन्हें नियंत्रित करना आसान नहीं होगा। पहली बार मंत्री बने माननीयो ने सिस्टम को ट्रैक से उतारा है उसे ट्रेक में लाने की जिम्मेदारी भी स्मृति ईरानी, सिद्धार्थ शंभु और कर्मवीर सिंह पर होगी।


