स्वतंत्र बोल
रायपुर 20 जून 2026: छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। कहीं तेज बारिश हो रही है तो कहीं गरज-चमक के साथ आंधी चल रही है। गर्मी से परेशान लोगों को भले ही राहत मिल रही हो, लेकिन प्रदेश के लाखों किसानों की नजरें अब भी मानसून पर टिकी हुई हैं। समय पर मानसून नहीं पहुंचने से धान की बुवाई प्रभावित होने लगी है और किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
खरीफ सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसल धान की बुवाई का समय शुरू हो चुका है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में खेत अब भी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाए हैं। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं और मानसून की देरी उनके लिए चिंता का कारण बनती जा रही है।
मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के सभी संभागों में कहीं न कहीं मध्यम से तीव्र मेघगर्जन, वज्रपात और बारिश की गतिविधियां दर्ज की गई हैं। विभाग ने अगले दो दिनों तक भी कई स्थानों पर तेज गरज-चमक और वज्रपात की संभावना जताई है।
प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा करपावंड और सामरी में 5 सेंटीमीटर दर्ज की गई। वहीं बास्तानार में 4 सेंटीमीटर तथा बकावंड, अंबिकापुर और भनपुरी में 3 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। नगरी, छुईखदान, मर्दापाल, लोहांडीगुड़ा, कुकरेल, दुर्ग, लाभांडीह, रायपुर शहर, पलारी और कोंडागांव में 2 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
बारिश के बावजूद किसानों की चिंता इसलिए कम नहीं हो रही क्योंकि अभी तक प्रदेशभर में व्यापक और लगातार वर्षा का दौर शुरू नहीं हुआ है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान की समय पर बुवाई के लिए नियमित और पर्याप्त बारिश जरूरी है। यदि मानसून की सक्रियता में और देरी होती है तो इसका असर खेती-किसानी पर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के मुताबिक पंजाब से हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार तक समुद्र तल पर एक मौसमी द्रोणिका बनी हुई है। वहीं पूर्वी विदर्भ से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश होते हुए तमिलनाडु तक एक अन्य द्रोणिका सक्रिय है, जिसके प्रभाव से प्रदेश में मौसम लगातार बदल रहा है।
शुक्रवार को प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रायपुर में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 22.7 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रिकॉर्ड हुआ।
फिलहाल मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन किसानों की असली राहत मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद ही मिलेगी। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की बुवाई और खरीफ सीजन की तैयारियों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। ऐसे में प्रदेशभर के किसानों की निगाहें अब बादलों और मौसम विभाग की अगली भविष्यवाणी पर टिकी हुई हैं।


