बाजार में बिक रहे ग्रीन क्रैकर्स की असलियत पर सवाल: सुप्रीम कोर्ट में वकीलों ने रखे तीखे तर्क

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स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 29 अक्टूबर 2026: बढ़ते प्रदूषण और पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्न बी वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई अगले हफ्ते यानी दिवाली के बाद तक के लिए टाल दी है। कोर्ट में पटाखों में बेरियम की मात्रा और ग्रीन पटाखों के दावों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली।

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बच्चों के फेफड़ों में मिल रहे काले धब्बे: एमिकस क्यूरी

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि पटाखों से निकलने वाले PM2.5 जैसे बेहद सूक्ष्म कण फेफड़ों में पहुंचकर खून के जरिए पूरे शरीर में फैल सकते हैं। उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि दिल्ली के डॉक्टर अब 14 से 16 साल के ऐसे बच्चों के फेफड़ों में भी काले धब्बे देख रहे हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि दिवाली के बाद अस्पतालों में सांस और गर्भावस्था से जुड़ी समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं।

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अपराजिता सिंह के मुताबिक, ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त नहीं हैं। सीएसआईआर (CSIR) और एनईईआरआई (NEERI) के फॉर्मूले के अनुसार इनमें उत्सर्जन करीब 30 फीसदी कम होता है, लेकिन इनसे भी प्रदूषण फैलता है। उन्होंने तर्क दिया कि जब प्रदूषण गंभीर होने पर निर्माण कार्य रोकने और स्कूलों को ऑनलाइन करने जैसे कड़े कदम उठाए जाते हैं, तो ऐसे में पटाखे चलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

याचिकाकर्ताओं और निर्माताओं के तर्क

याचिकाकर्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत से कहा कि सरकार विचार-विमर्श के लिए दो हफ्ते का समय मांग रही है, जबकि बाजार में पटाखों की बिक्री, ढुलाई और डिलीवरी लगातार जारी है। वहीं, याचिकाकर्ता अर्जुन गोपाल की वकील उत्तरा बब्बर ने आरोप लगाया कि बाजार में ‘ग्रीन क्रैकर्स’ के नाम पर भ्रामक लेबल वाले पटाखे बेचे जा रहे हैं, जिनकी असलियत जांचने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था या काम करने वाला QR कोड मौजूद नहीं है।

दूसरी ओर, पटाखा निर्माताओं के वकील जे. साई दीपक ने पूर्ण प्रतिबंध का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि पूर्ण प्रतिबंध कभी कारगर साबित नहीं होता, बल्कि इससे काला बाज़ार, चीनी उत्पादों और बिना लाइसेंस वाले पटाखों की बिक्री को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि नियम तोड़ने वालों के लाइसेंस रद्द होने चाहिए, लेकिन नियमों का पालन करने वाले वैध निर्माताओं को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

सरकार के कदम और कोर्ट की टिप्पणी

दिल्ली सरकार की ओर से पेश एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। 1 नवंबर से लागू होने वाली योजना के तहत बीएस-6 (BS6) मानक से नीचे के बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक, सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव और निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल जैसे कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि राजधानी में 608 एंटी-स्मॉग गन तैनात की गई हैं।

सुनवाई के अंत में अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि हर साल अदालती आदेशों का उल्लंघन होता है और नई पीढ़ी को प्रदूषण की इस गंभीर समस्या के प्रति अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।