स्वतंत्र बोल
रायपुर 23 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के लिए छात्रावास (हॉस्टल) और परिवहन (ट्रांसपोर्ट) सुविधा लेना अब अनिवार्य नहीं होगा। प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति के कड़े रुख और जारी किए गए दिशा-निर्देशों के बाद अब मेडिकल छात्र अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार कॉलेज परिसर में रहने या अपने घर/किराये के मकान से आने-जाने का विकल्प खुद चुन सकेंगे।
हॉस्टल और बस की अनिवार्यता पर रोक
विभिन्न निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा विद्यार्थियों पर यह दबाव बनाया जा रहा था कि वे अनिवार्य रूप से कॉलेज का हॉस्टल लें और बस या परिवहन सेवा का उपयोग करें। इससे छात्रों और उनके परिवारों पर भारी-भरकम शुल्क का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था, विशेषकर उन स्थानीय विद्यार्थियों के लिए जो अपने घर से रोजाना आना-जाना चाहते थे। इस मनमानी के खिलाफ आवाज उठने के बाद प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति ने हस्तक्षेप किया और स्पष्ट किया कि कोई भी कॉलेज छात्रों पर ये सुविधाएं थोप नहीं सकता है।
कॉलेजों को थमाया गया कारण बताओ नोटिस
इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति ने संबंधित सभी निजी मेडिकल कॉलेजों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब तलब किया है। कॉलेजों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उन्होंने किस आधार पर हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट को अनिवार्य किया था। साथ ही, समिति ने अपने अंतरिम आदेश में यह भी निर्देश दिए हैं कि जब तक इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक किसी भी छात्र को ‘डे-स्कॉलर’ (Day Scholar) के रूप में पढ़ाई करने से नहीं रोका जाएगा और उन्हें इसकी पूरी अनुमति दी जाएगी।


