स्वतंत्र बोल
रायपुर 23 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में उप संचालक डॉ. धर्मेंद्र कुमार गहवई के निलंबन ने नया और बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस कार्रवाई की वजह उनकी दो शादियों से जुड़ी करीब दो साल पुरानी शिकायत को बताया जा रहा है। जारी किए गए निलंबन आदेश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का हवाला दिया गया है, जो शासकीय सेवकों के बहुविवाह से जुड़े हैं। लेकिन इस पूरी कार्रवाई के समय और इसके पीछे की वजहों को लेकर अब कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं।
दो साल पुरानी शिकायत पर अब क्यों हुई कार्रवाई?
डॉ. गहवई पर अपनी पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने का आरोप काफी पुराना है। अब इसी मामले को उनके निलंबन का आधार बनाया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह शिकायत करीब दो साल पुरानी थी, तो विभाग ने इस पर मुहर लगाने या कार्रवाई करने में इतना लंबा समय क्यों लगाया? क्या इस दौरान कोई औपचारिक जांच हुई थी या कोई नया तथ्य सामने आया था? विभाग की ओर से इन सवालों के स्पष्ट जवाब अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच ठनी जंग
छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा विभाग में अपर संचालक के पद पर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की नियुक्ति को लेकर डॉक्टरों में पहले से ही भारी नाराजगी है। डॉक्टरों का साफ कहना है कि चिकित्सा से जुड़े इस अहम पद की जिम्मेदारी किसी मेडिकल क्षेत्र की समझ रखने वाले वरिष्ठ चिकित्सक को ही दी जानी चाहिए थी।
CIDA ने उठाए सवाल, हाईकोर्ट की लड़ाई से जोड़ा कनेक्शन
इस निलंबन पर छत्तीसगढ़ इन-सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (CIDA) ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। एसोसिएशन का दावा है कि डॉ. गहवई उन चुनिंदा चिकित्सकों में शामिल हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय (DHS) के चिकित्सकीय कैडर के प्रशासनिक पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की नियुक्तियों को सीधे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। CIDA का कहना है कि ऐसे समय में याचिकाकर्ता डॉक्टर के खिलाफ अचानक कार्रवाई होना गंभीर संदेह पैदा करता है और इससे अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ रहे अन्य चिकित्सकों पर दबाव बन सकता है। हालांकि, एसोसिएशन की यह प्रतिशोध की आशंकाएं हैं, जिन्हें अभी साबित होना बाकी है।
बड़े आंदोलन की चेतावनी और विभाग का रुख
CIDA ने चेतावनी दी है कि यदि यह कार्रवाई दुर्भावना या प्रतिशोध से प्रेरित पाई जाती है, तो वे कानूनी विकल्प अपनाने के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन भी करेंगे। एसोसिएशन ने मांग की है कि डॉ. गहवई के निलंबन के आधारों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग और शासन की तरफ से इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।


