क्या अब सस्ते में मिलेगा कैंसर का इलाज? सरकार के इस नए प्रस्ताव से मची हलचल

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स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 23 अक्टूबर 2026:
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाएं जल्द ही काफी सस्ती हो सकती हैं। केंद्र सरकार इन दवाओं पर ट्रेड मार्जिन अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित करने की योजना बना रही है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में जानकारी दी है कि इस कदम से कैंसर की दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में 20 से 70 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण पाना और मरीजों के इलाज के खर्च को कम करना है।

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विशेषज्ञ समिति को सौंपी गई रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की 8 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक की अध्यक्षता में एक विशेष विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति कैंसर के इलाज में काम आने वाली उन चुनिंदा दवाओं की सूची तैयार कर रही है जिन पर ट्रेड मार्जिन की यह सीमा लागू की जाएगी। समिति को 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, जिसके बाद NPPA आगे के निर्देश जारी करेगा।

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20 से 70 फीसदी तक कम हो सकते हैं दाम

सरकार का अनुमान है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से कैंसर की दवाओं के दाम में 20% से 70% तक की भारी गिरावट आ सकती है। इससे मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। ट्रेड मार्जिन की सीमा तय होने से दवा की खरीद और बिक्री के बीच के मुनाफे पर लगाम लगेगी। हालांकि, आपूर्ति व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए ट्रेड चैनल के वास्ते 30 प्रतिशत मार्जिन का प्रावधान रखा गया है।

साल 2019 में भी अपनाई गई थी ऐसी व्यवस्था

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में यह भी बताया कि फरवरी 2019 में NPPA ने 42 चुनिंदा गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित किया था। उस समय इस फैसले के बाद 526 ब्रांडों के दाम कम हुए थे, जिससे मरीजों को सालाना लगभग 2,984 करोड़ रुपये की बचत हुई थी। अब सरकार इसी तर्ज पर व्यापक कदम उठाने जा रही है। नई रूपरेखा तैयार करने से पहले दवा उद्योग और उपभोक्ता समूहों से भी चर्चा की गई है, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में दवाओं की उपलब्धता पर कोई असर न पड़े।