स्वतंत्र बोल
रायपुर 17 अक्टूूबर 2026: रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित सिद्धपीठ शीतला माता मंदिर परिसर में लगे सूचना बोर्ड पर लिखे शब्दों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यादव समाज ने आरोप लगाया है कि बोर्ड पर महिलाओं के लिए आपत्तिजनक और अपमानजनक शब्द लिखे गए। इस मामले में समाज के प्रतिनिधियों ने मंदिर के पीठाधीश नीरज सैनी के खिलाफ पुरानी बस्ती थाने में शिकायत की है। विधायक देवेंद्र यादव ने भी नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, पीठाधीश का कहना है कि पोस्टर श्रद्धालुओं से पैसे लेने की शिकायतों के बाद लगाए गए थे।
सूचना बोर्ड पर लिखे शब्दों पर यादव समाज की आपत्ति
जानकारी के मुताबिक, मंदिर परिसर में लगे सूचना बोर्ड पर लिखा था, “ठग रौताइनों से सावधान, जल चढ़ाने हेतु किसी भी रौताइन को रुपये न दें।”
यादव समाज का आरोप है कि इन शब्दों से समाज की महिलाओं का अपमान हुआ है और लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि सूचना बोर्ड से आपत्तिजनक शब्द हटाए जाएं।
पीठाधीश नीरज सैनी के खिलाफ थाने में शिकायत
विवाद को लेकर यादव समाज के प्रतिनिधि पुरानी बस्ती थाने पहुंचे और मंदिर के पीठाधीश नीरज सैनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में सूचना बोर्ड पर लिखे कथित आपत्तिजनक शब्दों को समाज की महिलाओं के सम्मान से जुड़ा मामला बताया गया है।
विवाद बढ़ने के बाद संबंधित शब्दों को सूचना बोर्ड से हटाने पर दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनने की बात भी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि शब्दों को पूरी तरह हटा दिया गया है या नहीं।
विधायक देवेंद्र यादव ने कार्रवाई की मांग की
विधायक देवेंद्र यादव ने इस मामले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि नवरात्र में मां भगवती की पूजा के बीच यादव-राउत समाज की माताओं और बहनों के लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उन्हें ठग बताना पूरे समाज की अस्मिता से जुड़ा मामला है। उन्होंने शीतला मंदिर के व्यवस्थापक और पुजारी की ओर से लगाए गए पोस्टर पर आपत्ति जताते हुए शासन-प्रशासन से जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने भी जताई आपत्ति
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि मंदिरों से सभी लोगों की आस्था जुड़ी होती है। ऐसे में किसी समाज के लोगों के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाले व्यक्ति को भगवान सद्बुद्धि दें।
पीठाधीश नीरज सैनी ने क्या सफाई दी?
विवाद पर मंदिर के पीठाधीश नीरज सैनी ने कहा कि करीब 17 साल पहले भी इस तरह के पोस्टर लगाए गए थे और उस समय किसी ने आपत्ति नहीं जताई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अब यादव समाज को इस पर आपत्ति क्यों हो रही है। मंदिर में श्रद्धालुओं से पैसे लेने की शिकायतें मिल रही थीं। उनका कहना है कि पोस्टर लगाने का उद्देश्य श्रद्धालुओं से पैसे लेने पर रोक लगाना था। उन्होंने यह भी कहा कि यादव समाज के लोग रात में मंदिर पहुंचे, शोर-शराबा किया और पोस्टर पर टेप चिपका दिया। फिलहाल, इस मामले में यादव समाज की शिकायत और पीठाधीश की सफाई सामने आई है। उपलब्ध जानकारी में पुलिस की ओर से गिरफ्तारी या किसी अन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।


