स्वतंत्र बोल
रायपुर 4 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के बड़ेकनेरा गांव की रहने वाली 17 वर्षीय हेमबती नाग का चयन ब्राजील में होने वाले वर्ल्ड स्कूल जूडो गेम्स के लिए हुआ है। आगामी दिसंबर में आयोजित होने वाली इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हेमबती पहली बार भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी। बचपन में ही माता-पिता को खोने वाली हेमबती ने बालिका गृह से निकलकर यह मुकाम हासिल किया है।
बालिका गृह से शुरू हुआ जूडो का सफर
हेमबती जब महज 10 साल की थीं, तब उनके माता-पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उन्हें बालिका गृह भेजा गया, जहां उनकी मुलाकात जूडो खेल से हुई। शुरुआत में सामान्य अभ्यास करने के बाद धीरे-धीरे उनकी रुचि इस खेल में बढ़ती गई। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद सात सालों तक कठिन अभ्यास जारी रखा और स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक अपना रास्ता तय किया।
2022 से लगातार छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व
हेमबती 40 किलो वजन वर्ग में मुकाबला करती हैं। वर्ष 2022 से 2026 के बीच उन्होंने लगातार विभिन्न राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक जूडो प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया और कई पदक जीते। लगातार बेहतर होते प्रदर्शन ने उन्हें बड़े मंच पर दांव-पेच दिखाने का अवसर दिया।
भोपाल ट्रायल में स्वर्ण पदक जीतकर पक्का किया टिकट
भारतीय खेल प्राधिकरण के भोपाल स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में आयोजित चयन ट्रायल में हेमबती ने दबाव के बावजूद शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। ट्रायल के दौरान उनके निजी कोच घनश्याम ठाकुर मौजूद थे, लेकिन नियमों की वजह से वह सीधे निर्देश नहीं दे सकते थे। ऐसे में साई सेंटर के कोच शैलेंद्र यादव के मार्गदर्शन में हेमबती ने गोल्ड मेडल अपने नाम कर ब्राजील का टिकट पक्का कर लिया।
हार से सीखकर बदली रणनीति
एक घरेलू मुकाबले में मिली हार के बाद हेमबती ने अपनी गलतियों से सीखा और अपनी तकनीक में बदलाव किया। जूडो एसोसिएशन के सचिव अरुण द्विवेदी के अनुसार, हेमबती की सबसे बड़ी ताकत उनका आत्मविश्वास और शांत दिमाग है। वह बड़े मुकाबलों में भी बिना घबराए विरोधी खिलाड़ी की चाल समझकर अपनी तकनीक का इस्तेमाल करती हैं।


