छत्तीसगढ़ का 18 साल पुराना पुलिस भर्ती विवाद, सुप्रीम कोर्ट से क्यों लगा बड़ा झटका?

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स्वतंत्र बोल
रायपुर 1 अक्टूबर 2026 :
छत्तीसगढ़ में साल 2006 की सूबेदार, प्लाटून कमांडर और उपनिरीक्षक भर्ती के चयनित अभ्यर्थियों की वरिष्ठता का करीब दो दशक पुराना विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने एलसी कोसले और अन्य की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी है। 30 सितंबर 2026 के इस आदेश के साथ छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का 23 जुलाई 2026 का फैसला बरकरार रहा।

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380 पदों के लिए निकली थी भर्ती

पुलिस मुख्यालय ने 18 सितंबर 2006 को सूबेदार, प्लाटून कमांडर और उपनिरीक्षक के कुल 380 पदों के लिए भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। 8 अप्रैल 2008 को पहली मेरिट सूची जारी हुई।

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इस सूची में एलसी कोसले, रवि सिंह ठाकुर, विनोद तोंडे और सैयद अहसान अली का चयन हुआ। चयन के बाद इनकी नियुक्ति हुई और उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा किया।

प्रश्नपत्र में गड़बड़ी के बाद बदली मेरिट लिस्ट

भर्ती की मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र-2 में आठ प्रश्नों और उनके मॉडल आंसर को लेकर गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद पुलिस भर्ती बोर्ड ने इन प्रश्नों को हटाकर उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन कराया।

27 जून 2009 को संशोधित मेरिट सूची जारी की गई। इस प्रक्रिया के बाद पहले हुई नियुक्ति रद्द हो गई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

2013 में सुप्रीम कोर्ट ने दी थी राहत

इस मामले में 9 जुलाई 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को सही माना था। साथ ही अभ्यर्थियों की तीन साल से अधिक की सेवा और उनके खिलाफ किसी तरह की धोखाधड़ी का आरोप नहीं होने को देखते हुए उन्हें राहत दी थी।

कोर्ट ने निर्देश दिया था कि उन्हें संशोधित सूची के आधार पर नई नियुक्ति माना जाए और वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाए। पुरानी वरिष्ठता और बकाया वेतन का लाभ देने से इनकार किया गया था।

वरिष्ठता को लेकर फिर शुरू हुआ विवाद

इसके बाद विवाद वरिष्ठता सूची को लेकर सामने आया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि 2013 के बाद तैयार वरिष्ठता सूचियों में उन्हें नए कर्मचारी मान लिया गया।

इस वजह से उन्हें 2008 से 2013 के बीच नियुक्त अन्य प्लाटून कमांडरों से नीचे रखा गया। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक इसका असर पदोन्नति पर भी पड़ा और उनके बाद नियुक्त कर्मी कंपनी कमांडर के पद पर पदोन्नत हो गए।

हाई कोर्ट ने 23 जुलाई को खारिज की थी याचिका

इस मामले में हाई कोर्ट की एकल पीठ और इसके बाद खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। 23 जुलाई 2026 के फैसले में कहा गया कि विभाग ने वरिष्ठता तय करते समय सुप्रीम कोर्ट के 2013 के आदेश का पालन किया है।

इसके बाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई।

सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत

अब 30 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एलसी कोसले और अन्य की SLP खारिज कर दी। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्रीचंद्रशेखर की पीठ के आदेश के बाद हाई कोर्ट का 23 जुलाई 2026 का फैसला बरकरार रहा।

इस फैसले के साथ वरिष्ठता को लेकर याचिकाकर्ताओं की मौजूदा मांग पर सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली।