स्वतंत्र बोल
बिलासपुर 28 सितम्बर 2026 : पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने विजय बघेल की ओर से दायर चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर खारिज करने की मांग की थी। मामला 2023 के पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भूपेश बघेल अपनी सभी कानूनी और तथ्यात्मक दलीलें हाई कोर्ट में चलने वाली सुनवाई के दौरान रख सकते हैं। इसके बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनाव याचिका की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
क्या है पूरा मामला?
दुर्ग सांसद विजय बघेल ने पाटन विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव के दौरान 48 घंटे की प्रचार-निषेध अवधि में कथित तौर पर रोड शो किया गया। विजय बघेल ने इसे चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा उल्लंघन बताते हुए भूपेश बघेल के निर्वाचन को शून्य घोषित करने की मांग की है।
भूपेश बघेल ने चुनाव याचिका की विचारणीयता यानी मेंटेनेबिलिटी पर सवाल उठाया था। उनका पक्ष था कि याचिका में जरूरी तथ्यों और कानूनी आधारों की कमी है। उन्होंने इसे शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
7 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की SLP खारिज कर दी। कोर्ट ने चुनाव याचिका को इस चरण पर खत्म करने से इनकार किया और कहा कि उठाए गए कानूनी और तथ्यात्मक मुद्दों पर हाई कोर्ट में ट्रायल के दौरान दलील दी जा सकती है।
इससे पहले छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी 15 जून 2026 को भूपेश बघेल की ओर से दायर आवेदन खारिज किया था। कोर्ट ने कहा था कि याचिका की मेंटेनेबिलिटी से जुड़े मुद्दों को साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल के दौरान देखा जाना चाहिए।
5 अक्टूबर को होगी साक्ष्य की प्रक्रिया
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 17 सितंबर 2026 के आदेश में भूपेश बघेल की ओर से दायर एक अन्य आवेदन को भी खारिज कर दिया। यह आवेदन चुनाव याचिका को समय-सीमा के आधार पर खारिज करने की मांग से जुड़ा था। कोर्ट ने कहा कि इस सवाल पर रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर विचार की जरूरत है।
अब हाई कोर्ट ने चुनाव याचिका में चुनाव याचिकाकर्ता के साक्ष्य दर्ज करने के लिए 5 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है। कोर्ट ने विजय बघेल को खुद और अपने गवाहों को अगली तारीख पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।


