स्वतंत्र बोल
बिलासपुर 15 सितम्बर 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आदेश दिया है कि सेवानिवृत्ति के अंतिम वर्ष में कर्मचारियों को उनके गृह जिले में पदस्थापना दी जानी चाहिए। आबकारी विभाग के एक हेड कांस्टेबल की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को उनके गृह जिले बिलासपुर में पदस्थ करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारी को इस आदेश की प्रति प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर आवश्यक पोस्टिंग आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं।
1993 में हुई थी नियुक्ति, जुलाई 2027 में हैं सेवानिवृत्त
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता हेड कांस्टेबल वर्तमान में रायगढ़ जिले में पदस्थ हैं और जुलाई 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनकी नियुक्ति 19 अप्रैल 1993 को आबकारी विभाग में सेल्समैन के रूप में हुई थी, जिसके बाद उन्हें नियमित कर आबकारी आरक्षक बनाया गया। वर्ष 2014 में उनका तबादला कोरबा से बिलासपुर हुआ था, जबकि 24 जून 2022 को उन्हें बिलासपुर से रायगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2023 में पदोन्नति मिलने के बाद भी वे रायगढ़ में ही कार्यरत हैं।
पत्नी की बीमारी और ट्रांसफर पॉलिसी के तहत मांगी थी पोस्टिंग
याचिकाकर्ता ने रायगढ़ से बिलासपुर तबादले के लिए वर्ष 2025 की ट्रांसफर पॉलिसी के क्लॉज 3.12 का लाभ देने की मांग की थी। याचिका में बताया गया कि उनकी पत्नी का स्वास्थ्य लगातार खराब चल रहा है और उनका इलाज जारी है। गृह जिले बिलासपुर में पदस्थापना के लिए उन्होंने आबकारी विभाग को कई बार अभ्यावेदन दिए थे, लेकिन उन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिसके बाद उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
राज्य सरकार की दलील को हाईकोर्ट ने किया निरस्त
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि 5 जून 2025 की ट्रांसफर पॉलिसी आबकारी विभाग पर लागू नहीं होती। सरकार के अनुसार इस नीति में पुलिस, आबकारी, परिवहन, वाणिज्यिक कर और शिक्षा विभाग को बाहर रखा गया है। साथ ही सरकार ने यह भी दलील दी कि कर्मचारी को उसकी पसंद की जगह पर पोस्टिंग पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने सरकार के इन सभी तर्कों को निरस्त कर दिया और कर्मचारी के जुलाई 2027 के रिटायरमेंट को ध्यान में रखते हुए गृह जिले में पोस्टिंग देने का आदेश जारी किया।


