स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 14 सितंबर 2026. बैंक से होम लोन, कार लोन या अन्य लोन लेने वालों के लिए आने वाले महीने अहम हो सकते हैं। SBI Research की Ecowrap रिपोर्ट में RBI की रेपो रेट बढ़ाने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद दिसंबर में भी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान है। यानी दिसंबर तक कुल 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। अगस्त में RBI ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा था। यह लगातार चौथी बैठक थी, जब दर में बदलाव नहीं किया गया। अब SBI Research ने महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के जोखिम को देखते हुए दर बढ़ाने की सिफारिश की है।
कच्चे तेल की कीमत क्यों बनी चिंता?
SBI Research के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी का जोखिम बना हुआ है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगले 15 दिनों में कच्चे तेल की कीमत 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। SBI Research का कहना है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो अक्टूबर और नवंबर में महंगाई 6.5 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो सकती है।
रेपो रेट बढ़ा तो EMI पर क्या असर होगा?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इसमें बदलाव होने पर बैंकों की ब्याज दरों पर भी असर पड़ सकता है। अगर बैंक लोन की ब्याज दर बढ़ाते हैं तो फ्लोटिंग रेट वाले लोन की EMI या लोन की अवधि में बदलाव हो सकता है। हालांकि, आपकी EMI कितनी बढ़ेगी, यह बैंक की नई ब्याज दर और आपके लोन की शर्तों पर निर्भर करेगा। इसका असर खास तौर पर उन लोगों के बजट पर पड़ सकता है, जिनकी हर महीने की EMI पहले से ही तय आय का बड़ा हिस्सा खर्च कर रही है।
दिसंबर तक 50 बेसिस पॉइंट बढ़ोतरी का अनुमान
SBI Research ने अक्टूबर में 25 बेसिस पॉइंट और दिसंबर में फिर 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की सिफारिश की है। अगर दोनों बढ़ोतरी होती हैं तो दिसंबर तक रेपो रेट में कुल 50 बेसिस पॉइंट का इजाफा हो सकता है। हालांकि, यह SBI Research का अनुमान है। इसे RBI का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। RBI की मौद्रिक नीति समिति ही रेपो रेट पर अंतिम फैसला करती है।
लोन लेने वालों को अभी क्या करना चाहिए?
अगर आपने बैंक से लोन लिया हुआ है तो सबसे पहले अपनी मौजूदा ब्याज दर चेक करें। यह भी देखें कि आपका लोन फ्लोटिंग रेट पर है या नहीं। इसके बाद बैंक से जानकारी लें कि ब्याज दर बढ़ने पर आपकी EMI या लोन की अवधि में क्या बदलाव हो सकता है। इससे आपको पहले से अपना मासिक बजट तैयार करने में मदद मिलेगी। अगर आप नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं तो अलग-अलग बैंकों की ब्याज दर और EMI की तुलना करना बेहतर रहेगा। इससे लोन की कुल लागत को समझने में मदद मिल सकती है।


