राजस्थान के शहरों में चला BJP का जादू, निकाय चुनाव में कांग्रेस से कितनी आगे?

स्वतंत्र बोल

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जयपुर 14 सितंबर 2026.  राजस्थान नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने बड़ी बढ़त हासिल की है। शहरी स्थानीय निकाय की जिन 309 सीटों के नतीजे घोषित किए गए हैं, उनमें भाजपा ने 163 सीटों पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस को 103 सीटें मिली हैं, जबकि 43 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे हैं। सोमवार सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना के साथ नतीजे सामने आए। इस चुनाव में कुल 38,889 उम्मीदवार मैदान में थे। नतीजों के साथ 10 नगर निगमों, 47 नगर परिषदों और 252 नगर पालिकाओं में गवर्निंग बोर्ड बनाने का रास्ता साफ हो गया है।

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दो चरणों में हुआ था मतदान

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को हुए थे। दोनों चरणों के लिए पूरे राज्य में सोमवार को एक साथ वोटों की गिनती शुरू हुई। चुनाव में कुल 73.56 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह पिछले शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के मतदान प्रतिशत से तीन प्रतिशत से अधिक रहा। चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के अलावा बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में थे। स्थानीय स्तर पर कई वार्डों में मुकाबला सीधे तौर पर प्रमुख दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच रहा।

भाजपा और कांग्रेस ने कितने उम्मीदवार उतारे?

भाजपा ने इस चुनाव में 9,290 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। कांग्रेस ने 9,027 उम्मीदवारों को टिकट दिया। निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या 18,732 रही। अन्य दलों में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के 948, आम आदमी पार्टी (AAP) के 311, बहुजन समाज पार्टी (BSP) के 298, CPI(M) के 185 और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के 98 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

भाजपा के लिए क्यों अहम हैं नतीजे?

नगर निकाय चुनाव के नतीजे मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में सत्ता में आने के बाद भाजपा के सामने शहरी इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती रही है। इन नतीजों से शहरी राजस्थान में भाजपा के प्रदर्शन का संकेत मिला है। साथ ही वार्ड स्तर पर पार्टी के संगठन और स्थानीय पकड़ की तस्वीर भी सामने आई है।

कांग्रेस के लिए भी परीक्षा

कांग्रेस के लिए नगर निकाय चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद अपने संगठनात्मक आधार को परखने का मौका रहे। पार्टी के सामने शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती थी। नतीजों से यह भी संकेत मिलेगा कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस स्थानीय स्तर पर कितना समर्थन जुटा पाई। भाजपा और कांग्रेस के बीच सीटों का अंतर इस चुनाव की सबसे अहम तस्वीरों में शामिल है।