स्वतंत्र बोल
रायपुर, 20 मई 2026: छत्तीसगढ़ के बस्तर को लेकर एक बार फिर सियासत उफान पर है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के तीन दिवसीय दौरे के आखिरी दिन जगदलपुर से किए गए बड़े ऐलानों ने जहां भाजपा को आक्रामक मोड में ला दिया, वहीं कांग्रेस ने सीधे शाह के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। अब सवाल सिर्फ नक्सलवाद खत्म करने का नहीं, बल्कि उस श्रेय का भी बन गया है, जिसे लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं।
जगदलपुर में केंद्रीय मध्य परिषद की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने बस्तर को लेकर अपना विजन सामने रखा। उन्होंने नक्सल उन्मूलन अभियान, विकास योजनाओं और भविष्य के “सेवा डेरों” के मॉडल पर विस्तार से बात की। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस बयान की हो रही है, जिसमें शाह ने पिछली कांग्रेस सरकार पर सीधा हमला बोला।
अमित शाह ने साफ कहा कि देश के कई गैर-कांग्रेसी राज्यों ने नक्सल उन्मूलन अभियान में केंद्र का सहयोग किया, लेकिन छत्तीसगढ़ की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस दिशा में कोई मदद नहीं की। शाह के इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए अमित शाह को “झूठ बोलने वाला” बता दिया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार आज जो भी बस्तर में कर रही है, उसकी नींव कांग्रेस सरकार ने रखी थी। भूपेश ने कहा कि उनके कार्यकाल में बस्तर के अंदर सड़क, स्कूल, राशन दुकान, सोलर लाइट, बाजार और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाएं पहुंचाई गईं, जिससे लोगों का भरोसा सरकार पर बढ़ा और नक्सल विरोधी अभियान को मजबूती मिली।
दरअसल, नक्सलवाद के खात्मे का श्रेय किसे मिलना चाहिए, इसे लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। कांग्रेस लगातार दावा करती रही है कि भूपेश सरकार के दौरान बस्तर में विकास कार्यों और विश्वास बहाली की वजह से नक्सलियों का जनाधार कमजोर हुआ। वहीं भाजपा अब इसे केंद्र की रणनीति और सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता बता रही है।
सियासी गलियारों में अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या अमित शाह के ताजा बयान ने कांग्रेस के “श्रेय मॉडल” पर फुल स्टॉप लगा दिया है या फिर यह बहस अब और ज्यादा तेज होने वाली है।
इधर, “सेवा डेरों” के ऐलान को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। भाजपा इसे बस्तर के विकास का नया ब्लूप्रिंट बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक पैकेजिंग करार दे रहा है।
बस्तर में नक्सलवाद, विकास और राजनीतिक श्रेय की इस जंग ने आने वाले दिनों की सियासत को और गर्म करने के संकेत दे दिए हैं।


