जंगलों में छिपा 300 साल पुराना खजाना! छत्तीसगढ़ के इस जिले से मिली रहस्यमयी पांडुलिपियां, अब ऐप से खुलेगा हर राज

स्वतंत्र बोल
महासमुंद,03 मई 2026:
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से एक बेहद हैरान करने वाली और ऐतिहासिक खोज सामने आई है, जहां जंगलों के बीच 300 साल से भी पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों का खजाना मिला है। ये पांडुलिपियां न सिर्फ प्राचीन ज्ञान का भंडार हैं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अनमोल धरोहर भी मानी जा रही हैं।

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इन बहुमूल्य पांडुलिपियों को अब ज्ञान भारतम ऐप के जरिए संरक्षित और डिजिटल किया जा रहा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया है। इस पहल का उद्देश्य देशभर में बिखरे प्राचीन ज्ञान को एक प्लेटफॉर्म पर लाना और उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करना है।

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महासमुंद जिला पहले से ही अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता रहा है। यहां स्थित सिरपुर जैसे पुरातात्विक स्थल प्राचीन सभ्यता के प्रमाण देते हैं। अब पांडुलिपियों के इस बड़े सर्वेक्षण के बाद महासमुंद को छत्तीसगढ़ का सबसे ज्यादा पांडुलिपियों वाला जिला घोषित किया गया है।

खास बात यह है कि ये पांडुलिपियां ज्यादातर ताड़पत्र पर लिखी गई हैं और इनमें उड़िया लिपि का इस्तेमाल हुआ है। इन ग्रंथों में भागवत पुराण, लक्ष्मी पुराण, दुर्गा ग्रंथ, ज्योतिष, जनजातीय परंपराएं, जड़ी-बूटी चिकित्सा, तंत्र-मंत्र, पशु चिकित्सा और इतिहास से जुड़े कई दुर्लभ विषय शामिल हैं।

जिले के बागबाहरा ब्लॉक के घने जंगलों में बसे जनजातीय इलाकों से इन पांडुलिपियों की खोज हुई है। आदिवासी परिवारों ने इन्हें पीढ़ियों से संभाल कर रखा हुआ है और आज भी धार्मिक, सामाजिक और पारंपरिक चिकित्सा कार्यों में इनका उपयोग किया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पांडुलिपि वह हस्तलिखित दस्तावेज होती है, जो आमतौर पर 75 वर्ष से अधिक पुरानी होती है और ताड़पत्र, भोजपत्र, ताम्रपत्र या अन्य पारंपरिक माध्यमों पर लिखी जाती है। इनमें प्राचीन इतिहास, धार्मिक ज्ञान, लोक परंपराएं और औषधीय जानकारी संजोई जाती है।

अब इन पांडुलिपियों के डिजिटल होने के बाद न सिर्फ इनके रहस्य दुनिया के सामने आएंगे, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को एक नई पहचान भी मिलेगी।