प्यार किया तो जान पर बन आई… धमकियों के साए में जी रहा जोड़ा, अब हाईकोर्ट ने उठाया बड़ा कदम

स्वतंत्र बोल
बिलासपुर,28 अप्रैल 2026:
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां प्यार करने की कीमत एक जोड़े को अपनी जान के डर से चुकानी पड़ रही थी। लगातार मिल रही धमकियों और अनहोनी की आशंका के बीच आखिरकार Chhattisgarh High Court ने हस्तक्षेप करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें Ramesh Sinha और Ravindra Kumar Agrawal शामिल थे, ने कोरबा एसपी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नवदंपति चिंटू अग्रवाल और अंजलि शर्मा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी स्थिति में उनके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खतरा नहीं होना चाहिए।

दरअसल, यह पूरा मामला एक लव मैरिज से जुड़ा है, जो अब डर और तनाव में बदल चुका था। कोरबा जिले के कटघोरा निवासी चिंटू और अंजलि लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे। धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदला और दोनों ने शादी करने का फैसला लिया।

परिवार के विरोध के बावजूद, दोनों ने 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के जयपुर में आर्य समाज के माध्यम से विवाह कर लिया और बाद में इसे विधिवत पंजीकृत भी कराया। शादी के समय दोनों बालिग थे, इसलिए कानूनन उनका विवाह पूरी तरह वैध है।

लेकिन शादी के बाद हालात बदल गए। अंजलि के परिवार की ओर से कथित तौर पर दोनों को लगातार धमकियां मिलने लगीं। इनमें ऑनर किलिंग और झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने जैसी गंभीर बातें शामिल थीं। डर के माहौल में जी रहे इस जोड़े ने कई बार पुलिस से शिकायत भी की, लेकिन उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिल पाई।

इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से कहा गया कि याचिका में लगाए गए आरोप स्पष्ट नहीं हैं और कोई ठोस संज्ञेय अपराध सामने नहीं आता। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को दरकिनार करते हुए दंपति की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

अपने फैसले में कोर्ट ने साफ कहा कि दो बालिग व्यक्तियों को अपनी पसंद से विवाह करने का पूरा अधिकार है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह समाज के लिए सकारात्मक हैं और ऐसे जोड़ों को हर तरह की धमकी से सुरक्षा मिलनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया कि यदि दंपति किसी भी प्रकार की शिकायत करते हैं, तो उसकी तुरंत जांच की जाए और आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएं। साथ ही रिश्तेदारों को भी चेतावनी दी गई है कि वे उनके वैवाहिक जीवन में किसी भी तरह का हस्तक्षेप न करें।

फिलहाल इस फैसले के बाद दंपति को राहत जरूर मिली है, लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है—क्या समाज में प्यार करना अब भी इतना बड़ा जोखिम है कि लोगों को अपनी ही जिंदगी बचाने के लिए अदालत का सहारा लेना पड़े?