स्वतंत्र बोल
बलौदाबाजार, 27 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने इतिहास के कई छिपे पन्नों को अचानक सामने ला दिया है। सदगुरु कबीर आश्रम, दामाखेड़ा में सर्वेक्षण के दौरान करीब 326 साल पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां मिली हैं, जिन्हें देखकर विशेषज्ञ भी हैरान रह गए।
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यह खोज “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत की गई, जो कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में जिलेभर में चलाया जा रहा है। सर्वे टीम जब विकासखंड सिमगा के कबीर धर्म नगर स्थित आश्रम पहुंची, तो वहां छिपी इन प्राचीन पांडुलिपियों का पता चला।
बताया जा रहा है कि ये पांडुलिपियां सन 1700 ईस्वी के आसपास की हैं, यानी लगभग 326 साल पुरानी। इनमें अनुरागसागर, अम्बूसागर, दीपकसागर और ज्ञान प्रकाश जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं। इन ग्रंथों को कबीर पंथ के 9वें आचार्य प्रगट नाम साहब द्वारा देवनागरी लिपि में लिखा गया था। ये पांडुलिपियां क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अहम प्रमाण मानी जा रही हैं।
सिर्फ यही नहीं, इस अभियान के दौरान सोनाखान स्थित संग्रहालय में 10 दिसंबर 1857 को अंग्रेजी हुकूमत द्वारा शहीद वीर नारायण सिंह को फांसी देने के आदेश से जुड़ा ऐतिहासिक दस्तावेज भी मिला है। यह दस्तावेज स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को और गहराई से समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
सर्वेक्षण के दौरान इन सभी पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण “ज्ञानभारतम” ऐप के माध्यम से किया गया, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन्हें सुरक्षित रखा जा सके। इस अवसर पर प्रशासन की ओर से एसडीएम अतुल शेट्टे ने सरपंच की उपस्थिति में दयाशंकर कबीर पंथी का सम्मान भी किया।
कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जिलेवासियों से अपील की है कि अगर उनके पास किसी भी प्रकार की प्राचीन पांडुलिपि, ताम्रपत्र या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे इस अभियान में सहयोग करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल दस्तावेजों की फोटो लेकर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, मूल प्रति मालिक के पास ही सुरक्षित रहेगी।
यह खोज न सिर्फ इतिहास को जीवंत करती है, बल्कि यह भी बताती है कि हमारे आसपास अब भी कई ऐसे रहस्य छिपे हैं, जो सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।
