GRAP-II पाबंदियों के बाद भी क्यों नहीं थम रहा प्रदूषण? PM2.5 के खतरनाक स्तर ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

Untitled

स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 6 नवंबर 2026:
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का संकट लगातार गहराता जा रहा है। शुक्रवार सुबह राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) सुबह 8 बजे 389 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि, कई इलाकों में स्थिति इससे भी ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है, जहां AQI 400 का आंकड़ा पार कर ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में पहुंच गया है। सुबह के शुरुआती आंकड़ों में रोहिणी का AQI 472, आईआईटी दिल्ली का 467, पंजाबी बाग का 462 और जहांगीरपुरी का 460 दर्ज किया गया है। हवा की धीमी रफ्तार के कारण प्रदूषक कणों का फैलाव प्रभावित हो रहा है, जिससे हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।

ad

PM2.5 बना सबसे बड़ा खतरा

राजधानी में प्रदूषण की इस समस्या के बीच PM2.5 सबसे प्रमुख प्रदूषक बनकर सामने आया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 53 केंद्रों पर PM2.5 ही मुख्य प्रदूषक रहा। ये बेहद महीन कण सांस के जरिए सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। बिगड़ते हालात के बीच GRAP के दूसरे चरण (GRAP-II) के तहत सड़कों पर पानी का छिड़काव और धूल नियंत्रण की कार्रवाई लगातार जारी है।

youtube

गुरुग्राम में भी हवा ‘बेहद खराब’

उधर, साइबर सिटी गुरुग्राम में भी लगातार तीसरे दिन वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी बनी हुई है। मौसम संबंधी परिस्थितियां प्रदूषकों के फैलाव में बाधा बन रही हैं, जिससे यहाँ भी PM2.5 का स्तर अधिक होने के कारण लोगों को सांस संबंधी परेशानियां बढ़ने की आशंका है।

मौसम का हाल और कृत्रिम बारिश की कवायद

मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में आज अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। सुबह हल्का कोहरा छाने की संभावना है, जबकि दिन में आसमान मुख्यतः साफ रहने और बारिश के आसार नहीं हैं। ऐसे में मौसम से तत्काल प्रदूषण धुलने की कोई उम्मीद नहीं है। इस बीच, प्रदूषण से राहत पाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास तेज किए गए हैं। चर्चा है कि इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास कृत्रिम बारिश यानी क्लाउड सीडिंग की संभावनाएं तलाशने के लिए पिछले 15 दिनों में दो परीक्षण किए जा चुके हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि हवा की गति, तापमान और नमी के स्तर को देखते हुए ही आगे की रणनीति तय होगी। फिलहाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को बाहर की गतिविधियां सीमित करने और मास्क पहनने की सलाह दी है।