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नई दिल्ली / रायपुर 15 अक्टूबर 2026। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि के पवित्र दिनों को बेहद शुभ और ऊर्जावान माना जाता है। साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर को घटस्थापना के साथ हुई थी और इसका समापन 19 अक्टूबर को महानवमी के दिन होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष आराधना की जाती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसे में यदि किसी बच्चे का जन्म इन पावन दिनों में होता है, तो परिवार में इसे अत्यंत शुभ और देवी का आशीर्वाद माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक दृष्टिकोण से इन बच्चों के व्यक्तित्व और स्वभाव को लेकर कई खास बातें प्रचलित हैं।
नवरात्रि में जन्म लेने वाले बच्चों का विशेष स्वभाव
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि का समय शक्ति, साहस, भक्ति और सकारात्मकता का प्रतीक है। यही वजह है कि इस दौरान जन्म लेने वाले बच्चे स्वभाव से काफी उत्साही, आत्मविश्वासी और अपने जीवन के लक्ष्यों को लेकर बेहद गंभीर होते हैं। इन बच्चों पर मां दुर्गा की विशेष कृपा मानी जाती है, जिसके प्रभाव से उनका व्यक्तित्व मजबूत और प्रेरणादायक बनता है।
आत्मविश्वास और दूसरों की मदद करने का भाव
मां दुर्गा को शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है, जिसका सीधा असर इन बच्चों के स्वभाव पर देखा जा सकता है। ये स्वभाव से बहुत साहसी और आत्मविश्वासी होते हैं। इसके साथ ही, नवरात्रि में सेवा, दान और जरूरतमंदों की सहायता करने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी कारण इस अवधि में जन्म लेने वाले बच्चे दयालु प्रवृत्ति के और दूसरों के प्रति संवेदनशील होते हैं।
नवरात्रि के दिनों और देवी के स्वरूपों का प्रभाव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के हर एक दिन का अपना अलग महत्व है और जन्म के दिन के आधार पर बच्चे के स्वभाव में मां के उस विशेष स्वरूप की झलक देखी जा सकती है:
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मां शैलपुत्री: इस दिन जन्मे बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और अद्भुत दृढ़ता देखी जाती है।
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मां ब्रह्मचारिणी: यह स्वरूप तप और संयम का प्रतीक है, जिससे बच्चों में अनुशासन और सहनशीलता आती है।
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मां चंद्रघंटा: इस दिन जन्म लेने वाले बच्चे स्वभाव से निडर और साहसी होते हैं।
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मां स्कंदमाता: मातृत्व और वात्सल्य से जुड़े इस दिन जन्मे बच्चे स्नेही और परोपकारी होते हैं।
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अन्य स्वरूप: इसी तरह मां कात्यायनी को शक्ति, मां कालरात्रि को भयमुक्त, मां महागौरी को पवित्रता और मां सिद्धिदात्री को ज्ञान व सिद्धियों का प्रतीक माना जाता है, जिनके सकारात्मक गुण इन बच्चों के जीवन में झलकतें हैं।


