स्वतंत्र बोल
रायपुर 18सितंबर 2026: जगदलपुर की विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने 25 मई 2013 को हुए झीरम घाटी हत्याकांड मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट की जजमेंट कॉपी के अनुसार, इस वीभत्स हमले की साजिश 25 फरवरी 2013 को नक्सलियों की साउथ रीजनल यूनिफाइड कमांड की बैठक में रची गई थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ अपराध माना और अपने फैसले में 26/11 मुंबई हमले की नजीर पेश की। इस हमले में 27 लोगों की जान गई थी।
25 फरवरी को रची गई थी हमले की पूरी साजिश
जजमेंट के मुताबिक, टीसीओसी (TCOC) के दौरान दरभा डिवीजन में बड़ी वारदात को अंजाम देने का प्रस्ताव नक्सली कमांडर बारसे देवा और सुरेंद्र ने रखा था। इसके बाद शीर्ष नक्सली नेता गणपति और रमन्ना की मंजूरी से जयलाल को सीआरसी (CRC) कंपनी 2 की टुकड़ी के साथ भेजा गया। हमले के लिए एंबुश की जगह चुनने की जिम्मेदारी देवजी, गणेश उईके, बारसे देवा और सुरेंद्र को दी गई थी, जबकि सामान जुटाने का काम SZC श्याम और सुरेंद्र को सौंपा गया था।
150 से अधिक नक्सलियों ने मिलकर किया था हमला
झीरम घाटी में परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हुए इस हमले को अंजाम देने में सुरेंद्र, बारसे देवा, जयलाल, विनोद, सोनाधार सहित 150 से अधिक नक्सली शामिल थे। अदालत में अभियुक्त चैतू लेकाम ने खुद स्वीकार किया कि उसने और प्रमिला मड़ियाम ने काफिले पर गोलियां चलाई थीं। चैतू ने इंसास राइफल से 10 राउंड फायर किए थे। वहीं, प्रमिला, बंजामी सन्ना और महादेव नाग ने हमले के बाद जवानों के हथियार लूटे थे।
एनआईए की जांच में 101 गवाह और 207 दस्तावेज
एनआईए ने अपनी जांच के दौरान अदालत के समक्ष 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए और 207 साक्ष्य दस्तावेज पेश किए। हमले के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों से 22 हथियार लूटे थे, जिनमें एके-47, इंसास, एमएम पिस्टल और एसएलआर (SLR) शामिल थे। फैसले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा को नक्सलियों द्वारा बंधक बनाए जाने की बात का भी जिक्र किया गया है।
27 फरार आरोपियों पर फैसला बाकी
मामले में कुल 39 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से 11 पर ट्रायल चला और 10 को दोषी पाते हुए मौत की सजा सुनाई गई। कवासी कोसा नाम के एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है। बाकी 27 आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं, जिन पर एनआईए कोर्ट ने अभी कोई निर्णय नहीं दिया है। फरार 27 आरोपियों में से 14 मुख्यधारा में लौट चुके हैं, जबकि 9 अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं।
कोर्ट ने फैसले में 26/11 मुंबई हमले का दिया हवाला
अदालत ने अपने फैसले में 26/11 के मुंबई आतंकी हमले का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह अजमल कसाब और उसके साथियों ने साजिश रचकर लोगों पर हमला किया था, ठीक उसी प्रकार इन आरोपियों ने भी परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हमले की साजिश में अपनी-अपनी भूमिका निभाई। हमले की साजिश में सीधी संलिप्तता और अपराध की बर्बरता को देखते हुए ही अदालत ने 10 आरोपियों को फांसी की सजा का आदेश दिया है।


