झीरम हत्याकांड: 27 मौतों के दोषियों को फांसी या राहत? आज शाम 4.30 बजे एनआईए कोर्ट सुनाएगी बड़ा फैसला!

स्वतंत्र बोल जगदलपुर 16 सितंबर 2026: एनआईए (NIA) कोर्ट के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत आज शाम 4:30 बजे बहुचर्चित झीरम हत्याकांड मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों को सजा सुनाएंगे। अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अपनी-अपनी दलीलें पेश किए जाने के बाद ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में आने वाले इस जघन्य हत्याकांड के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

27 लोगों की गई थी जान, अभियोजन ने मांगी अधिकतम सजा

कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि यह हमला अचानक नहीं हुआ था, बल्कि पूर्व नियोजित षड्यंत्र, रेकी और योजना के तहत अंजाम दिया गया था। इस हमले में राजनीतिक नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों सहित 27 लोगों की जान गई थी। अभियोजन ने जानबूझकर गोली चलाए जाने और पीड़ित परिवारों को पहुंचे गंभीर नुकसान को आधार बनाते हुए आरोपियों को मृत्युदंड या न्यूनतम आजीवन कारावास जैसी अधिकतम सजा देने की मांग की है।

राशन पहुंचाने और दबाव की दलीलों पर तीखी बहस

अभियोजन पक्ष के सहयोगी अधिवक्ता संजय शुक्ला ने तर्क दिया कि आरोपियों पर लगाई गई धाराओं के तहत ही सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आरोपी नक्सलियों के दबाव में काम करने की बात कह रहे हैं, तो इसके समर्थन में कोई गवाह पेश क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि नक्सलियों तक राशन पहुंचाने से उन्हें ताकत मिली, जिससे अपराध की योजना को अंजाम देने में मदद मिली।

बचाव पक्ष ने मृत्युदंड का किया विरोध, मांगी राहत

दूसरी ओर, बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने मृत्युदंड की मांग का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आरोपी ग्रामीण हैं, उनके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है और वे पहले ही करीब 12 साल जेल में बिता चुके हैं। बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपी नक्सलियों के दबाव में काम कर रहे थे, इसलिए उन्हें सुधार का मौका मिलना चाहिए। इसके आधार पर बचाव पक्ष ने न्यूनतम सजा देने और अब तक भुगती गई सजा को देखते हुए शेष अवधि में राहत देने की मांग रखी।