रायपुर 04 अक्टूबर 2022. महिला बाल विकास विभाग में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। विभाग में जारी गड़बड़ी और अनियमितताओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है तो आदेशों में होती त्रुटि विभाग की वास्तविक स्थिति बयां कर रही है। बीते दिनों संचालक ने राज्योत्सव के लिए आधा दर्जन अधिकारियो की ड्यूटी लगाया जिसमे उपसंचालक सुरेंद्र चौबे को संयुक्त संचालक संबोधित किया गया था जबकि सुरेंद्र चौबे को 3 अक्टूबर को संयुक्त संचालक से पदावनत कर उपसंचालक किया गया है। संचालक को चूक का अहसास दो दिनों बाद 31 अक्टूबर को हुआ तब संशोधित आदेश जारी किया गया।
अब सवाल उठता है कि नोटशीट चलाने वाले अफसरों को सुरेंद्र चौबे के पदावनत होने की जानकारी नहीं थी या जानबूझकर संचालक को गलत जानकारी दी गई और संचालक ने भी बिना जाँच पड़ताल के आदेश जारी कर दिया। अधिकारी इसे लिपिकीय त्रुटि बता सफाई दे सकते है पर ऐसा बार बार होने लगे तो स्थिति संदेहास्पद हो जाता है।
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कुछ महीनो पहले एक सेवानिवृत परियोजना अधिकारी की शिकायत मंत्रालय में सचिव तक पहुंची। शिकायर्ताओं ने कहा कि परियोजना अधिकारी तिवारी को नियमो के विपरीत पदोन्नत किया गया। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सचिव भुवनेश यादव ने जाँच समिति गठित कर दिया। शिकायतकर्ता ने किसी से बात करते हुए पूरी शिकायत की पोल खोल दी।

बताते है कि विभागीय अफसरों ने पूर्व से ड्राफ्ट पेपरों में शिकायर्ताओं से दस्तखत लेकर महानदी में जमा कर दिया था। उक्त प्रकरण में गैरजिम्मेदार अफसरों ने संचालक के लिए मुसीबत खड़ी कर दिया है। इससे पहले उपसंचालक सुनील शर्मा ने संचालक के अनुमोदन बिना ही वजन मशीनों के संबंध में आदेश जारी कर दिया था, अब हो सकता है बाद में अनुमोदन करा लिया हो। विभाग में ऐसे दर्जनों मामले में सामने आये है जिसमे आदेश जारी होने के बाद संशोधन या अनुमोदन किया गया है। उक्त मामले संचालक की स्थिति को बयां करते है।
सिंगी की वापसी के बाद चौबे का हुआ डिमोशन, सेटअप से अधिक बने उपसंचालक.. सुनील का करना होगा डिमोशन!
