रायपुर 08 अगस्त 2022. महिला बाल विकास विभाग अघोषित तौर पर सरकारी लूट का अड्डा बन गया है, यहाँ लूट को खुली छूट है। जिसके चलते गर्भवती महिलाओ और छोटे बच्चो के लिए ख़रीदे जाने वाले सामग्रियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितता हो रहा है। मुख्यालय में पदस्थ अफसर अप्रत्यक्ष रूप से संगठित गिरोह बनाकर ऐसे कार्यो को अंजाम दे रहे है। दरअसल विभाग प्रमुख ने सभी योजनाओ के लिए होने वाली खरीदी को केंद्रीयकृत कर दिया है जिसका परिणाम सामने है। संचालक महिला बाल विकास ने साल 2017 में बनी क्रय समिति को निरस्त कर साल 2020 में नई समिति बनाया जिसमे आईसीडीएस को तमाम उन सभी खरीदी का अधिकार दिया गया जो पूर्व में अलग अलग अधिकारी करते थे। इस समिति के पदेन अध्यक्ष संयुक्त संचालक आईसीडीएस तो सचिव सहायक संचालक बजट को बनाया और पूरी गड़बड़ी यही से शुरू हुई। विभाग द्वारा कुर्सी, बर्तन, वजन मशीन, ब्लैक बोर्ड, करकुलम, पंखा, प्री स्कूल किट सहित दर्जन सामग्री क्रय की जाती है जिसे पर विभाग प्रत्येक वर्ष करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है। केंद्रीयकृत होने से सभी अधिकार एक व्यक्ति विशेष को मिलने से कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार चरम पर है।
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घटिया फर्नीचर ख़रीदा-
विभाग ने प्रदेश भर के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रो में उपयोग के लिए प्लास्टिक की कुर्सियां खरीदी। लाखो रुपये कीमत की कुर्सियां आंगनबाड़ी केन्द्रो में पहुंचने से पहले ही टूट गई। टूटी कुर्सी की फोटो वायरल होने पर विभाग ने जिलाधिकारियों से जानकारी माँगा और खानापूर्ति की। ना सप्लायर पर कार्यवाही हुई ना ही दंडित किया गया।
दस गुना दाम पर ख़रीदा वजन मशीन-
विभाग ने वजन त्यौहार मानने जेम पोर्टल से दस गुना अधिक दाम पर वजन मशीन ख़रीदा। 400 रुपये कीमत की मशीनों को विभाग ने करीब 4000 रुपये की दर पर ख़रीदा है। जिसे सप्लायर ने स्टैंपिंग भी नहीं किया और जिलों में सप्लाई कर दी। शिकायतों के बाद मशीनों को उपयोग ना करने का निर्देश जारी करना पड़ा। खरीदी में बंदरबांट के आरोपों के बाद संचालक दिव्या मिश्रा ने सफाई दी कि “सप्लायर ने सिर्फ 5000 मशीने ही आपूर्ति की है, बाकी साढ़े 12 हजार मशीने अभी नहीं मिली है..वितरित मशीनों को स्टैंपिंग होने तक उपयोग नहीं करने कहा गया है।”
प्री स्कूल किट खरीदी में गड़बड़ी
आंगनबाड़ी केन्द्रो में बच्चो के लिए ख़रीदे जाने वाले प्री स्कूल किट झोल किया गया। सप्लायरों ने आईसीडीएस के अधिकारियो के साथ मिलीभगत कर निर्धारित सामने से आधा सामान ही सप्लाई किया और भुगतान पूरा लिया। बालोद जिले में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद ना तो सप्लायर पर कार्यवाही हुई ना ही अधिकारी समीर पांडेय पर।
सीएसआर मद की गाड़िया
विभाग में संचालक के विवश पात्र अफसरों का मोनोपली है वे मनमर्जी से निजी स्वार्थपूर्ति के लिए काम कर रहे है। बीते दिनों केंद्रीय योजनाओ की लगभग 400 करोड़ रुपयों को एचडीएफसी बैंक में अकाउंट खोलकर ट्रांसफर कर दिया गया। बदले में बैंक प्रबंधन ने तीन नई चारपहिया गाड़िया विभागीय अफसरों को गिफ्ट किया था। मामला खुलने पर उच्चाधिकारियों ने संचलनालय में पदस्थ अफसरों को फटकार के साथ गाड़िया लौटने के निर्देश दिए पर वह भी एक कर्मी के आपर्टमेंट के नीचे कव्हर कर रखा गया है। इन सभी गड़बड़ियों में खुले तौर पर उपसंचालक सुनील शर्मा और एक अन्य अफसर पर गंभीर आरोप लगे उसके बाद भी विभाग प्रमुख ने कोई कार्यवाही नहीं की।
