रायपुर 14 अप्रैल 2022. उच्च शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा संस्थानों में आरटीआई अधिनियम का पालन नहीं हो पा रहा है। महीनो बीतने के बाद जनसूचना अधिकारी जवाब नहीं दे रहे, मनमानी का आलम है कि जनसूचना अधिकारी के कार्यो में कुलपति हस्तक्षेप कर रहे है। सूचना के अधिकार का ऐसा माखौल शायद ही कही अन्य विभागों में देखने को मिले।
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केस नंबर एक-
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में असिस्टेंट रजिस्ट्रार ने सूचना के अधिकार अंतर्गत जानकारी माँगा। आवेदन कार्यालय में जाकर जमा किया और पावती ली। महीने भर बाद जवाब नहीं मिलने पर दोबारा स्मरण पत्र लिखा तो विश्वविद्यालय के जनसूचनाधिकारी हर्ष पांडेय ने जवाब भेजा कि “कुलपति के निर्देशानुसार आवेदक का आवेदन ईमेल से प्राप्त नहीं हुआ, आवेदन विधि संगत नहीं होने के कारण निरस्त किया जाता है।” आवेदक चुन्नीलाल टंडन ने बताया उन्होंने 15 मार्च को विधिवत विश्वविद्यालय में जमा किया था। जनसूचना अधिकारी द्वारा दिया गया जवाब विश्वविद्यालय में जारी मनमानी की बयां करता है।
केस नंबर दो-
सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय में ग्रंथपाल के पदों पर हुई नियुक्ति को लेकर आरटीआई से जानकारी माँगा गया था। निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने आवेदक को जवाब भेजा कि “नियुक्ति प्रक्रियाधीन है, जिसके चलते जानकारी नहीं दी जा सकती और अभी किसी का चयन नहीं हुआ है।” जबकि विश्वविद्यालय में ग्रंथपाल पद पर भर्ती मार्च के अंतिम दिनों में पूरी हो गई थी। उक्त पद पर डॉ. ओमप्रकाश पटेल का चयन किया गया है, उसके बाद 5 अप्रैल को जनसूचना अधिकारी डॉ वीणा सिंह ने भ्रामक जानकारी भेजा।
केस नंबर तीन-
उच्च शिक्षा संचालनालय में जनवरी में जनसूचना अधिकारी से आवेदक ने जानकारी माँगा, निर्धारित समयसीमा में जवाब ना मिलने पर प्रथम अपील किया। तत्कालीन प्रथम अपीलीय अधिकारी खैरवार ने जनवरी में सुनवाई करते हुए आवेदक को 15 दिनों के भीतर निःशुल्क जानकारी देने का आदेश पारित किया। आदेश के दो महीने बीतने के बाद भी डीम्ड जनसूचना अधिकारी और जनसूचना अधिकारी द्वारा आवेदक को जानकारी नहीं दिया गया है। बताते है कि डीम्ड जनसूचना अधिकारी आकाश दुबे ने आदेशों का उल्लंघन कर जानकारी नहीं भेजा है, जिसकी शिकायत आवेदक ने राज्य सूचना आयोग में किया है।
