रायपुर 18 दिसंबर 2022. इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में जारी अनियमितता और गड़बड़ीयो की कलई परत दर परत खुलती जा रही है। विश्वविद्यालय में पूर्व कुलपति कर्नल डॉ. संजय पाटिल के दस वर्षो के कार्यकाल में विवादों और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगते रहे, वही परिस्थितयां अब भी बनी हुई है। इस बार आरोपों के केंद्र में है विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गिरीश चंदेल। दस महीने पहले 24 फरवरी को राजभवन के आदेशों के बाद कुलपति की जिम्मेदारी संभाली। विश्वविद्यालय में बायोटेक्नोलॉजी विषय के एचओडी है। शिक्षकीय पेशे में उनके काम को दिल्ली और विदेशो में सराहा गया। इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में जारी भर्राशाही और अनियमितता सार्वजनिक होने पर कुलपति डॉ गिरीश चंदेल नाराज है। उन्होंने कहा कि

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“हम अच्छा काम करने यहाँ आये है, उसमे सबको सहयोग करना चाहिए। पुरानी अनियमितताओं या बातो को लेकर दुष्प्रचार ठीक नहीं है। विश्वविद्यालय में वर्षो तक अन्य दूसरे राज्यों के कुलपति बने, उन्होंने अपने अनुसार विश्वविद्यालय को चलाया और अनेक विवाद सामने आये। पहली बार स्थानीय (छत्तीसगढ़िया) कुलपति यहाँ बना है, जिसे वे लोग हजम नहीं कर पा रहे, इसीलिए पुराणी गड़बड़ियों और भ्रामक दुष्प्रचार कर रहे है.. जिससे विश्वविद्यालय और प्रबंधन की छवि धूमिल हो रही है।”
डॉ. चंदेल माटी पुत्र (छत्तीगढ़िया) है, तिल्दा के पास उनका गांव है। कृषि विश्वविद्यालय में पढ़ने का बाद वही प्रोफ़ेसर बन गए और अब कुलपति। उनके कुलपति बनने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रबंधन पर लगने वाले आरोपों से दुखी है। सरकारी धन और नियमो का दोहन करने वालो पर कड़ी कार्यवाही कर मेसेज देने की आवश्यकता है ना कि स्थानीयवाद के सहारे ऐसे गड़बड़ियों पर पर्दा डाला जाए।
