स्वतंत्र बोल
रायपुर/बिलासपुर 21 मार्च 2024. उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत होने वाली भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और नियुक्तियों में अनियमितता के मामलो में छत्तीसगढ़ अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय बिलासपुर में भर्ती प्रक्रिया में जमकर मनमानी की गई, बेलगाम कुलपति अपनों को उपकृत करने में जुटे रहे और अंततः वे जीत गए। अभ्यर्थियों और बीजेपी नेताओ द्वारा पीएमओ,सीएमओ और राजभवन में दर्जनों शिकायत और स्वतंत्र बोल द्वारा लगातार मुखरता से विश्वविद्यालय प्रबंधन के फर्जीवाड़े को उजागर करने पर साल भर तक भर्ती प्रक्रिया रुकी रही, जिसे अचार सहिंता लागू होने के बाद पूरी कर दी गई। जिस भर्ती प्रक्रिया को राजभवन ने रोकने फरवरी में आदेशित किया था, उसकी भर्ती 17 मार्च को कुलपति डॉ बंशगोपाल सिंह के द्वारा पूरी कर दी गई और नवनियुक्त कर्मियों ने तुरंत ज्वाइनिंग भी कर लिया।
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पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय बिलासपुर में फरवरी 2023 में आठ विभिन्न पदों में भर्ती संबंधी विज्ञापन जारी किया था। विज्ञापन में रोस्टर, आरक्षण सहित अनेको खामियां थी, जिसका तत्कालीन में अभ्यर्थियों ने विरोध किया था। उधर विज्ञापन के साथ उन पदों में चयनित होने वाले अभ्यर्थियों क नाम भी सोशल मीडिया में वायरल हो गया था, और उन्ही अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई है।
स्वतंत्र बोल ने बताया था नाम-
विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा अपने परिचितों को बैकडोर से विभिन्न पदों में नियुक्ति देने की तैयारी में जुटा था, इसके लिए कुलपति डॉ बंशगोपाल सिंह द्वारा साम दाम दंड भेद सहित हर तरकीब अपनाया गया। स्वतंत्र बोल ने निर्भीकता से विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा की जा रही गड़बड़ियों को उजागर किया तो आनन फानन में कुलपति ने बिमारी के बहाने कार्य परिषद् की बैठक को निरस्त कर दिया था। स्वतंत्र बोल ने गोमेद पाठक, दीपक पांडेय, अजय पांडेय, पंकज गुप्ता सहित जिन नामो का खुलासा किया था, उन्ही अभ्यर्थियों का चयन विश्वविद्यालय प्रबंधन और कुलपति द्वारा किया गया है। विश्वविद्यालय ने भर्ती प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा और 17 मार्च को पूरी हुई भर्ती प्रक्रिया की जानकारी को आज दिनांक तक सार्वजनिक नहीं किया है। जबकि नियमतः प्रबंधन को इसकी जानकारी वेबसाइट में अपलोड कर सार्वजनिक करना था।
फर्जीवाड़ा का कीर्तिमान रच दिया कुलपति ने-
कुलपति डॉ बंशगोपाल सिंह ने फर्जीवाड़ा का नया कीर्तिमान रच दिया है। अनेको शिकायते, जाँच और राजभवन द्वारा रोक लगाने के बाद आचार सहिंता लागू होने वाले दिन लिफाफा खोलकर फर्जीवाड़े का झंडा फहरा दिया है। कुलपति डॉ. सिंह ने विगत आठ वर्षो में पुस्तक छपाई, बांड जमा, निर्माण कार्यो में भ्रष्टाचार के बाद फर्जीवाड़े का नया कीर्तिमान रच दिया है।
कुलपति को झटका: भर्ती में की मनमानी तो राजभवन ने दिखाई सख्ती, नियुक्ति पर लगाई रोक।
