एक ही समय पर 3 जगह से चलती है ये ट्रेन, 4 दिन में तय करती है 3100 KM का सफर, कैसे होता है ये करिश्मा?

नई दिल्‍ली 18 अगस्त 2023: अगर आपसे पूछा जाए कि फलां नंबर की रनिंग ट्रेन इस समय कहां होगी, तो आप सर्च कर किसी एक स्‍टेशन का नाम बताएंगे। यह जवाब आपका गलत भी हो सकता है। एक ट्रेन, जिसका नंबर भी एक है, वह एक समय में एक से अधिक स्‍टेशनों पर हो सकती है। अब सोच पर पड़ गए होंगे कि यह कैसे हो सकता है, लेकिन ऐसा ही है। आज हम जिस ट्रेन के संबंध में बताने जा रहे हैं, वो एक ही समय में दो नहीं बल्कि तीन स्‍टेशनों से चलती है। आइए जानें यह करिश्‍मा कैसे होता है?

छोटी दूरी की ट्रेन, जो अपने गंतव्‍य तक पहुंचने में 24 घंटे से कम समय लेती है, वो एक समय में एक ही स्टेशन पर होती है। लेकिन ऐसी ट्रेन जो अंतिम स्‍टेशन तक पहुंचने में 24 घंटे से अधिक का समय लेती है, वो ट्रेन एक समय में दो स्‍थानों पर हो सकती है और जो ट्रेन 48 घंटे से अधिक समय में गंतव्‍य तक पहुंच रही है, वो एक समय में तीन स्‍टेशनों पर हो सकती है। रोजाना चलने वाली ट्रेन ही एक समय में तीन स्‍टेशनों पर हो सकती है।

देश की संबसे लंबी दूरी के लिए रोजना चलने वाली ट्रेन नंबर 15909/15910 अवध असम है. यह ट्रेन असम के डिब्रूगढ़ से राजस्‍थान के लालगढ़ तक चलती है. इस दौरान 3100 किमी. से अधिक की दूरी तय करती है और 88 स्‍टेशनों पर रुकती है. ट्रेन इन स्‍टेशनों में कहीं दो से लेकर पांच मिनट तक रुकती है। ठहराव औसतन तीन मिनट का माना जाए तो चार घंटे से अधिक समय इस ट्रेन का स्‍टेशनों पर रुकने में गुजरता है।

7 ट्रेन सेट की पड़ती है जरूरत

रोजाना चलने वाली अवध-असम एक्‍सप्रेस ट्रेन को चलाने में सात ट्रेन सेट की जरूरत पड़ती है। स्‍टेशन से शुरू होने के बाद ट्रेन चौथे दिन अपने गंतव्‍य तक पहुंचती है। इस वजह से दोनों ओर से तीन-तीन ट्रेन चलती हैं और एक ट्रेन सेट अतिरिक्‍त में रहता है।

एक समय पर तीन स्‍टेशनों का जानिए करिश्‍मा

उदाहरण के लिए 15909 नंबर की ट्रेन सुबह डिब्रूगढ़ से 10.20 बजे चलती है। उसी दौरान दूसरी ट्रेन सुबह 10.45 बजे बिहार के कटियार जंक्‍शन से चलती है, जो डिब्रूगढ़ से 1166 किमी. दूर है। यह वो ट्रेन है, जो डिब्रूगढ़ से एक दिन पूर्व चली होती है. वहीं, उसी समय तीसरी ट्रेन 2247 किमी. दूर सुबह 10.38 बजे उत्‍तर प्रदेश के बरेली स्‍टेशन पर होती है, यह ट्रेन दो दिन पूर्व डिब्रूगढ़ से चली होती है, जो चलने के तीसरे दिन बरेली में होती है।

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