रायपुर 2 अप्रैल 2022. पदोन्नति की राह ताकते कर्मी सीनियर अफसरों की मनमानी से परेशान है। आरोप है कि निर्धारित समय सीमा के बाद भी कर्मियों को नियमानुसार पदोन्नत नहीं किया जा रहा है। मामला रोजगार एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का है जहा कर्मियों को नियमानुसार पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा रहा है, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश है।
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जानकारी अनुसार विभाग में साल 2014 जारी भर्ती के अनुसार वर्ष 2015 में दर्जन भर कर्मियों को कर्मशाला सहायक पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दी गई। जिन्हे अगले पांच वर्षो के बाद प्रक्षिक्षण अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया जाना था। पदोन्नति के पूर्व ही साल 2019 में भर्ती नियमो में होने पर उन्हें कर्मशाला सहायक से मेंटनेंस मैकेनिक पदोन्नत किया गया जबकि उन्हें प्रशिक्षण अधिकारी पदोन्नत किया जाना था। पदोन्नति को लेकर पूर्व में दायर याचिका में कोर्ट ने अक्टूबर 2021 को ट्रेनिंग अफसर के रिक्त पदों पर पदोन्नति का आदेश जारी किया। कोर्ट द्वारा जारी निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी विभाग ने आदेशों का पालन नहीं किया है।
संचालक ने कहा कोर्ट में तथ्य छिपाया गया.. अभ्यावेदन निराकृत-
याचिकर्ताकर्ता दौलत जोशी, महेशचंद्र बागले, सुप्रिया प्रसाद और दिनेश कुमार निषाद ने न्यायालय के आदेशों के पालन हेतु संचालक अवनीश शरण को अभ्यावेदन दिया जिसे संचालक ने यह कहते अस्वीकार कर दिया कि
“आप लोगो ने भर्ती नियम में संशोधन संबंधी तथ्य कोर्ट में छिपाया है, ऐसे में किया गया प्रमोशन सही है और अभ्यावेदन को अमान्य करते हुए निराकृत किया जाता है”
याचिकाकर्ताओं के अनुसार कोर्ट ने शासन का पक्ष सुनने के बाद ही आदेश पारित किया था।
कोर्ट की फटकार पर 22 को मिला था प्रमोशन-
विभागीय अफसरों की मनमानी कर्मियों की पदोन्नति में बाधक बन रही है। ऐसे ही पदोन्नति आदेशों की तामीली न होने पर अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए संचालक और सचिव को व्यक्तिगत उपस्थित होने का निर्देश दिया था तब वर्ष 2014 में प्रचलित नियमो के अनुसार ही 22 याचिकाकर्ताओं को साल 2020 ट्रेनिंग अफसर पदोन्नत किया गया था, तब संचालक आईएफएस विवेक आचार्य थे।
