रायपुर 08 जुलाई 2022. महिला बाल विकास विभाग में पदोन्नति में गड़बड़ी और योजनाओ में जारी कमीशनखोरी की कलई खुलने पर संचालक ने दबाव बनाने के उद्देश्य से स्वतंत्र बोल को लीगल नोटिस भेजा है। सहायक संचालक से उपसंचालक की पदोन्नति में गड़बड़ी, सरकारी बंगले में साज सज्जा और अनियमितता संबंधी खबरों को स्वतंत्र बोल ने प्रमुखता और निर्भीकता से प्रकाशित किया जिससे तमतमाई महिला बाल विकास संचालक आईएएस दिव्या मिश्रा ने क़ानूनी कार्यवाही की चेतावनी दी है।
|
WhatsApp Group
|
Join Now |
|
Facebook Page
|
Follow Now |
|
Twitter
|
Follow Us |
|
Youtube Channel
|
Subscribe Now |
महिला बाल विकास विभाग में सहायक संचालक से उपसंचालक पदोन्नति में गड़बड़िया की गई। डीपीसी की आरटीआई से मिले दस्तावेजो से गड़बड़ी की पुष्टि हुई कि एक सहायक संचालक को पदोन्नत करने पदों की गलत गणना की गई, एक अन्य सहायक संचालक के सीआर का प्रथम पेज गायब हो गया, पूर्व में पदोन्नत सहायक संचालको की गणना ही नहीं की गई, एक उपसंचालक के लिए पद सुरक्षित नहीं किया और बेहद गोपनीय तरीके से डीपीसी की गई। जिससे प्रभावित होने वाले सहायक संचालको ने शिकायत की। शंकर निवासी उमाकांत तिवारी ने स्थापना प्रभारी रामजतन कुशवाहा को सस्पेंड कर संचालक को हटाने की मांग करते हुए मुख्य सचिव और विभागीय मंत्री अनिला भेड़िया से शिकायत की। संचालक और अधिकारियो की टीम मंत्री से मिलने बंगले गई पर मंत्री ने तत्काल अनुमोदन करने की बजाये रोक दिया था।
आईएएस दिव्या मिश्रा को स्वतंत्र बोल में 1 जून को प्रकाशित ‘‘उपसंचालक पदोन्नति में गड़बड़ी मामला: पहले भी हुई पदोन्नति में गड़बड़ी, 2005 की डीपीसी का फाइल गायब… संचालक को हटाने की मांग” और 13 जून को प्रकाशित “आखिर किस सहायक संचालक को पदोन्नत करने संचालक को लगानी पड़ी थी दौड़..?” खबरों पर आपत्ति की है। ऐसे में उन्हें बताना चाहिए कि क्या कि अनुमोदन के लिए मंत्री बंगला नहीं गई थी? क्या उन्होंने सरकारी बंगले में इंटीरियर डेकोरेशन और साज सज्जा नहीं कराया? आखिर ऐसी क्या परिस्थिति निर्मित हुई कि संचालनालय में सभी तरह की खरीदी केंद्रीयकृत कर आईसीडीएस से करने का आदेश दिनांक 29.09.2020 को जारी किया जिसमे पदेन अध्यक्ष संयुक्त संचालक आईसीडीएस और सहायक संचालक आईसीडीएस सुनील शर्मा को पदेन सचिव बनाया गया था। पर्यवेक्षक भर्ती में जारी सूची को निरस्त कर दोबारा सूची जारी करने की नौबत क्यों आई ? आखिर ज्वाइनिंग के पहले ही दिनांक 15 पर्यवेक्षकों पदस्थापना आदेश में संसोधन क्यों किया गया? संचालनालय में पांच संयुक्त संचालको के होने के बाद भी स्थापना प्रभारी उपसंचालक रामजतन कुशवाहा सीधे संचालक को रिपोर्ट क्यों करते है? एचडीएफसी बैंक के कायाबांधा शाखा में नए खाते खोले गए जिसके बदले में सीएसआर मद से बैंक प्रबंधन ने दो चमचमाती गाड़ियां गिफ्ट किया था। ऐसे दो दर्जन से अधिक प्रश्न अनुत्तरित है जिनके जवाब अब ढूंढे जायेंगे और संचालक की भूमिका सार्वजनिक की जाएगी। स्वतंत्र बोल पूर्णतः जिम्मेदारी से जनहित की पत्रकारिता करता है वो ऐसे क़ानूनी चेतावनी से नहीं डरता है।
आईएएस का बंगला संवारने खर्चे लाखो रूपए, सीएम से शिकायत.. तब हुआ भुगतान,, एसीबी में शिकायत!
