गुदड़ी के लाल का कमाल! दिहाड़ी मजदूर का बेटा बना जज, 31वीं बिहार न्यायिक सेवा में लहराया परचम

बिहार 14 अक्टूबर 2022: बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा में जमुई जिले के सिकंदरा के गुदड़ी के एक लाल सूरज ने कमाल किया है। दिहाड़ी मजदूर का बेटा सूरज कड़ी मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई कर सफलता का परचम लहराया है।

सातवीं पास बाप का बेटा आज जज बन गया है। सूरज की इस सफलता पर सिर्फ परिवार वाले ही नहीं बल्कि इलाके के लोगों में खुशी का माहौल है। जमुई जिले के सिकंदरा के पुरानी बाजार का रहने वाला सूरज कुमार चौधरी बेहद गरीब परिवार से आता है। सूरज के पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। बचपन में घर दुकान पर अंडे और चना बेचने वाला सूरज जज बन गया. पासी समाज के दलित परिवार से आने वाला सूरज का कहना है कि न्यायिक सेवा अपने आप में गर्व करने वाला है। उसकी कोशिश होगी कि वह लोगों को न्याय दिला पाए।

सूरज पढ़ाई में लगन और अपनी मेहनत की बदौलत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक और कानून की पढ़ाई करने के बाद से ही न्यायिक सेवा की परीक्षा की तैयारी में जुट गया था। दिन रात कड़ी मेहनत कर उसने पहले ही प्रयास में 31वीं बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा में सफलता पा ली है। सूरज कुमार चौधरी के जज बनने के बाद उसके घरवाले जहां खुशी में झूम रहे हैं वहीं इलाके के लोग भी खुश हैं कि गरीब दलित परिवार का बेटा न्यायिक सेवा में खुद को शामिल कर लिया है।

सूरज कुमार 8 भाई और एक बहन है। बचपन उसकी गरीबी और परेशानी में गुजरी है। इंटर तक पढ़ाई उसने सिकंदरा में ही की थी। न्यायिक सेवा में परचम लहराने वाला सूरज कुमार चौधरी ने बताया कि गरीबी इस कदर थी कि इंटर तक पढ़ाई करने के दौरान अपने घर के आगे एक छोटी सी गुमटी पर वह अंडे और चना बेचा करता था। आज वह खुश है कि हर किसी को भी गौरवान्वित करने वाली न्यायिक सेवा सेवा जुड़ गया है। उसकी कोशिश रहेगी कि हर किसी को न्याय दिलाने में वह भरपूर सहयोग करेगा। खासकर गरीब तबके के लोगों के बीच कानून के प्रति जागरूकता लाने के लिए वह काम करेगा।

सूरज कुमार चौधरी के पिता कृष्ण नंदन चौधरी ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूरी करता है। हालांकि, दो साल पहले उसका बड़ा बेटा आइआइटी मुंबई से पढ़ाई करने के बाद मर्चेंट नेवी में है। इसके बाद उसके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। वह अपने बच्चों को हमेशा पढ़ने लिखने के लिए कहता था। वे कहते हैं कि अपने समाज और गरीब तबके के लोगों से कहूंगा की शिक्षा में बहुत दम है। वे भी अपने बच्चों को पढ़ाएं और आगे बढ़ाएं।

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